महाकालेश्वर मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता और शुद्धता के लिए एफएसएसएआई द्वारा 5 स्टार रेटिंग दी गई है। लड्डू की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इसके तहत लड्डू बनाने में शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू, किशमिश व अन्य सामग्रियों का निर्धारित मात्रा में उपयोग किया जाता है।
पैकेजिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बोर्ड और लेमिनेटेड पेपर का इस्तेमाल होता है, ताकि लड्डू लंबे समय तक ताजा बने रहें। यदि निर्माण में किसी भी प्रकार की गंभीर लापरवाही पाई जाती है, तो 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया या कच्चा माल उपयोग करने पर 5 लाख रुपये और प्रसाद के पैकेट में वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
यह जानकारी मंदिर की उपप्रशासक सिम्मी यादव ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए लड्डू प्रसाद की बढ़ती मांग को देखते हुए मंदिर समिति ने टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अत्याधुनिक मशीनें लगाने की तैयारी की है, जिस पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
फिलहाल लड्डू प्रसाद यूनिट महाकाल मंदिर से लगभग आठ किलोमीटर दूर चिंतामण गणेश मंदिर के पास स्थित है। अब इसे 20 करोड़ रुपये की लागत से त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र (भोजनशाला) में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां अत्याधुनिक लड्डू प्रसाद यूनिट स्थापित की जाएगी और यहीं से प्रसाद तैयार किया जाएगा।
ऐसी होगी लड्डू प्रसाद यूनिट
50 हजार वर्गफुट क्षेत्र में 20 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा अन्नक्षेत्र में इस यूनिट का निर्माण किया गया है। इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल शामिल हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2026-27 के लिए 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। अब लड्डू बनाने में आधुनिक मशीनों का उपयोग होगा।
प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं। आवेदन करने वाले के पास कम से कम 3 साल का खाद्य सामग्री निर्माण का अनुभव होना चाहिए। साथ ही FSSAI और ISO 22000 का प्रमाणन तथा कम से कम 40 करोड़ रुपये का टर्नओवर होना अनिवार्य है। लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन तय की गई है।
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मंत्रोच्चार के साथ बनती है प्रसादी
लड्डू बनाने में देशी घी, बेसन, रागी, पिसी हुई शक्कर, सूखा मेवा, इलायची पाउडर, केसर और जायफल पाउडर का उपयोग किया जाता है। सभी सामग्री पूरी तरह सात्विक होती है और इसमें किसी प्रकार का प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंग नहीं मिलाया जाता। विशेष बात यह है कि प्रसाद का निर्माण मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। घी, बेसन और रागी को धीमी आंच पर लंबे समय तक भुना जाता है, जिससे स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है।
प्रतिदिन 50 क्विंटल की खपत
महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन लगभग 50 क्विंटल लड्डू प्रसाद की खपत होती है, जो विशेष पर्वों पर बढ़कर 100 क्विंटल तक पहुंच जाती है। मंदिर में बेसन के लड्डू 400 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध हैं। प्रसाद 50, 100, 200 और 400 रुपये के विभिन्न पैकेट में मिलता है। इसके अलावा रागी के लड्डू भी उपलब्ध हैं।
