इंदौर जिले में जनगणना के अंतर्गत हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) सर्वे की शुरुआत आज एक मई से होने जा रही है। सेल्फ इन्यूमरेशन की समय सीमा अब समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद अब सुपरवाइजर सीधे जनता के घर जाकर आवश्यक जानकारी जुटाएंगे। यह महत्वपूर्ण सर्वे आगामी एक महीने तक निरंतर जारी रहेगा। 

कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि सर्वे के संचालन हेतु प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए चार्ज ऑफिसर्स की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विस्तृत ब्रीफिंग की गई है और सभी प्रगणकों एवं सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण कार्य भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। यह पूरा अभियान जनगणना निदेशालय के दिशा-निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है, क्योंकि इसके आंकड़े राष्ट्र की भविष्य की नीतियों के निर्माण में आधारभूत भूमिका निभाते हैं। कलेक्टर ने जिले के नागरिकों से विशेष अपील की है कि जब सर्वे दल उनके घर पहुंचे, तो वे टीम को सटीक और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराकर सहयोग करें। साथ ही उन्होंने जनता को किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है।

डिजिटल माध्यम से ग्यारह लाख मकानों की होगी गिनती

इंदौर जिले में इस अभियान के तहत 11 लाख से अधिक मकानों की गणना का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अकेले नगर निगम क्षेत्र के 7 लाख 15 हजार मकान शामिल हैं। इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए 7200 से अधिक कर्मचारियों की फौज तैयार की गई है, जिनमें प्रगणक और पर्यवेक्षक दोनों शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हाल ही में होलकर साइंस कॉलेज में विभिन्न चरणों में सघन प्रशिक्षण दिया गया है। खास बात यह है कि इस बार जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और पहली बार मोबाइल ऐप के जरिए डाटा संग्रहित किया जाएगा। मई के पूरे महीने यह डिजिटल अभियान चलेगा, जबकि व्यक्तियों की वास्तविक गणना अगले साल शुरू की जाएगी।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच विवाद

जनगणना ड्यूटी के आवंटन को लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और जिला प्रशासन वर्तमान में आमने-सामने हैं। इसी सप्ताह बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक संकुल पहुंचकर अपनी ड्यूटी के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, कलेक्टर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि सरकारी कर्मचारियों को जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य को प्राथमिकता देनी ही होगी और इसमें किसी भी प्रकार की राहत प्रदान नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया है और महिला कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्याओं को नजरअंदाज करने की शिकायत की है। कल से शुरू होने वाले मकान गणना के चरण के लिए प्रगणकों की जिम्मेदारी तय हो चुकी है, जिसमें प्रतिदिन लगभग 200 घरों की काउंटिंग का लक्ष्य है।

कार्यकर्ताओं ने दी विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी

ड्यूटी पर तैनात आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि उनकी पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का आकलन किए बिना ही ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाना कठिन हो गया है। कई कार्यकर्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें उनके निवास स्थान वाले वार्डों के बजाय दूर-दराज के क्षेत्रों में भेज दिया गया है। कार्यकर्ताओं के अनुसार कई महिलाएं अस्वस्थ हैं तो कुछ पर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की जिम्मेदारी है। आंगनवाड़ी केंद्रों के नियमित कार्यों, जैसे गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में जाकर सर्वे करना उनके लिए व्यावहारिक नहीं है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर विचार कर व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो वे अपने विरोध को और अधिक उग्र कर सकती हैं।



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