नगर निगम इंदौर में पानी बांटने के लिए टैंकरों का सहारा ले रहा है, लेकिन जल संकट झेल रहे कई लोग भी सुबह अपने वाहनों से पानी ढोकर लाते हुए देखे जा सकते हैं। नौकरी या दुकान पर जाने से पहले उन्हें साफ पानी की चिंता करनी पड़ती है और उसे पाने के लिए तीन से चार किलोमीटर की दूरी बाइक, रिक्शा या बुलेट से तय करनी पड़ती है।

इंदौर के नयापुरा, भोई मोहल्ला, तिलक पथ सहित आसपास के मोहल्लों में जल संकट बना हुआ है। लोगों का कहना है कि एक दिन छोड़कर नल आते हैं। उसमें भी साफ पानी नहीं मिलता। दस मिनट तक गंदा पानी आता है, और जब तक एक-दो बाल्टी साफ पानी भरते हैं, तब तक नल बंद हो जाते हैं। ऐसे में या तो 30-40 रुपये की पानी की केन दिनभर के लिए खरीदनी पड़ती है या फिर खुद ही साफ पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।

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In Indore, petrol is being used for water, and vehicles are forced to carry it from three to four KM away

इंदौर जल संकट : रहवासियों का दर्द
– फोटो : अमर उजाला


नयापुरा से स्कूटर पर अपनी पोती और तीन खाली केन लेकर आए मोहम्मद जावेद कहते हैं कि उन्हें एक किलोमीटर दूर मल्हार आश्रम पानी की टंकी पर आना पड़ता है। सुबह-सुबह दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं, क्योंकि उनकी बस्ती में पीने का तो क्या, उपयोग करने का पानी भी साफ नहीं आता। कई बार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। इस कारण उन्हें रोज दुकान पर जाने से पहले पानी भरने आना पड़ता है।

शाहबुद्दीन, जो ऑटो रिक्शा चलाते हैं, रोज चार किलोमीटर दूर गौरीनगर बस्ती से पानी भरने टंकी तक आते हैं। वे बताते हैं कि जहां वे रहते हैं, वहां सरकारी नलों पर बहुत भीड़ रहती है। इतना इंतजार नहीं कर सकते, इसलिए ऑटो में खाली केन लेकर रोज टंकी पर आते हैं। इसके बाद सवारियां छोड़ने का काम करते हैं।

जेल रोड से बाइक पर पानी लेने आए माणकचंद बताते हैं कि गर्मी इतनी ज्यादा है कि बोरिंग ने जवाब दे दिया है। नगर निगम के टैंकरों का भी कोई भरोसा नहीं रहता, कभी आते हैं, कभी नहीं। पानी तो रोज चाहिए, इसलिए रोज बाइक से पानी ढूंढने निकलना पड़ता है।

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इंदौर जल संकट पर बोले रहवासी
– फोटो : अमर उजाला


नहीं भर पा रहीं टंकियां

शहर में गर्मी के दिनों में टंकियों से होने वाला जल वितरण भी प्रभावित हो रहा है। जो टैंकर पानी बांट रहे हैं, वे दिनभर टंकियों से पानी भरते रहते हैं। इस कारण टंकियां पर्याप्त मात्रा में नहीं भर पातीं और दूसरे दिन टंकी से जुड़े इलाकों में कम दबाव से पानी आता है। शहर के ज्यादातर इलाकों में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई हो रही है। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। इस कारण अब वे परिवार भी नर्मदा जल पर निर्भर हो गए हैं।

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इंदौर में पानी का हिसाब-किताब

  • 55 से अधिक टंकियों से पूरे शहर में सप्लाई होती है। हर टंकी में 2 से 3 एमएलडी पानी भरा जाता है।
  • यशवंत सागर तालाब से 30 एमएलडी पानी लिया जाता है, जिससे 5 टंकियां भरती हैं।
  • निजी व सार्वजनिक बोरिंगों से पहले लगभग 50 एमएलडी पानी की पूर्ति हो जाती थी, लेकिन बोरिंग सूखने के कारण अब नर्मदा जल पर निर्भरता बढ़ गई है।
  • तालाबों में जल स्तर कम होने से आसपास की कॉलोनियों के बोरिंगों में भी पानी कम हो गया है।




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