माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में भारत भवन में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श ‘प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड’ में शनिवार को देश, समाज, मीडिया और नए भारत के निर्माण को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण सबके साझा प्रयासों से ही संभव होगा और इसमें मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश ने 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य तय किया, जबकि कई पड़ोसी देश पहले से ही दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रहे थे। उन्होंने माना कि विकास का रोडमैप तय करने में भारत वर्षों पीछे रहा, लेकिन अब देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। हरिवंश ने कहा कि बदलते समय और नई तकनीक के दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखना जरूरी है। पिछले एक दशक में देश में आधारभूत संरचना, डिजिटल तकनीक और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में तेजी से काम हुआ है।
मजबूत अर्थव्यवस्था से मजबूत राष्ट्र
नए भारत का निर्माण और हम भारत के लोग विषय पर बोलते हुए हरिवंश ने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी भारत का सोना गिरवी रखना पड़ा था, जबकि आज देश के पास मजबूत स्वर्ण भंडार है। उन्होंने शेल कंपनियों पर हुई कार्रवाई और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को भी नए भारत की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विजन का कभी मजाक उड़ाया गया था, लेकिन आज गांव-गांव में यूपीआई से भुगतान हो रहा है। देश में करोड़ों सक्रिय बैंक खाते हैं और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों की है। हरिवंश ने कहा कि तकनीक में पिछड़ने वाला देश गुलामी की ओर बढ़ता है, इसलिए नई तकनीक को सीखना और विकसित करना समय की आवश्यकता है।
मातृभाषा को सीखना और उस पर गर्व करना जरूरी
वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा ने कहा कि विदेशों में नागरिकों के भीतर सिविक सेंस साफ दिखाई देता है और लोग अपने कर्तव्यों का स्वाभाविक रूप से पालन करते हैं। अगर भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाना है तो नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मातृभाषा को सीखना और उस पर गर्व करना बेहद जरूरी है। सिन्हा ने कहा कि देश निर्माण केवल सरकारों के भरोसे नहीं हो सकता, इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से भारतीय भाषाओं और भारतीय मूल्यों से जुड़ने की अपील की।
पत्रकारिता की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में सूचना और पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका पर भी चर्चा हुई। हरिवंश ने कहा कि ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ के समय से ही सूचना की ताकत को पहचाना गया था। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र ने नागरिक अनुशासन को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद बताया, जबकि प्रत्यूष रंजन ने एआई तकनीक को समझने और नियंत्रित तरीके से उपयोग करने पर जोर दिया। टीवी पत्रकार सईद अंसारी ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने और नोट्स बनाने की आदत विकसित करने की जरूरत बताई।
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पत्रकारिता में विचार अहम, भाषा सिर्फ माध्यम
भारतीय पत्रकारिता के वैचारिक अधिष्ठान विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि पत्रकारिता का मूल आधार विचार है, भाषा केवल माध्यम है। उन्होंने कहा कि स्वत्व, स्वाभिमान और राष्ट्रबोध भारतीय पत्रकारिता की मूल चेतना रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकार को देश और समाज के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। वहीं सी. जयशंकर बाबू ने पत्रकारिता को सेवा और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा माध्यम बताया।
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भूमंडलीकरण के बाद मीडिया को नई आजादी
भूमंडलीकरण के बाद का भारत और मीडिया विषय पर चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि आज सूचना किसी एक वर्ग के नियंत्रण में नहीं है और मीडिया पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार नगमा सहर ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से लगातार पढ़ने और भाषा पर पकड़ मजबूत करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान लाइव कार्टून शो और कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए कार्टूनिस्टों ने विद्यार्थियों के सामने लाइव कार्टून बनाकर प्रस्तुति दी।
