अधिकारियों की टालमटोल, जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?
विभाग से बात कर लीजिए – कलेक्टर
हादसे के बाद जिम्मेदार अफसरों के बयान भी सवालों के घेरे में हैं। इस मामले में जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मामले को पर्यटन विभाग पर डालते हुए कहा कि आप विभाग के अधिकारियों से बात कर लीजिए। बीमा विभाग का आंतरिक मामला होता है।
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अभी दस्तावेज की जांच करेंगे- सचिव
वहीं, पर्यटन विभाग के सचिव और बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा ने कहा कि हम अभी रिस्क्यू अभियान में ही व्यस्त थे। अभी दस्तावेज नहीं देखे हैं। आप एडवाइजर राजेंद्र निगम से बात कर लीजिए।
संजय मल्होत्रा बता पाएंगे- एडवाइजर
इस मामले में टूरिज्म बोर्ड के एडवाइजर व नौसेना के पूर्व कमांडर राजेंद्र निगम ने कहा कि अन्य जगहों भोपाल और हनुमंतिया में क्रूज का बीमा है, बरगी की जानकारी नहीं। यह जानकारी रीजनल मैनेजर ही दे पाएंगे।
मैनेजर से पूछकर बताता हूं- रीजनल मैनेजर
पर्यटन निगम के जबलपुर के रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा ने भी स्पष्ट जानकारी देने से बचते हुए कहा कि मैनेजर से पूछकर ही बता पाएंगे।
बीमा का आवेदन किया था, सर्वेयर नहीं आया : मरावी
होटल मैकल रिसॉर्ट एवं बोट क्लब बरगी के निलंबित मैनेजर सुनील मरावी ने बताया कि उनकी बीमा पॉलिसी मार्च 2026 में समाप्त हो रही थी। इसके नवीनीकरण के लिए उन्होंने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में आवेदन किया था। मरावी के अनुसार, इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बताया गया कि सर्वेयर मौके पर आकर सर्वे करेगा, जिसके बाद ही पॉलिसी प्रभावी (एक्टिव) होगी। इसके बाद सर्वेयर नहीं आया।
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यह आपराधिक लापरवाही- अजय दुबे
सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस पूरे मामले को ‘आपराधिक पर्यटन’ करार देते हुए कहा कि बिना सुरक्षा और बीमा के लोगों को क्रूज में बैठाना सीधे-सीधे आपराधिक लापरवाही है। इसकी जिम्मेदारी मंत्री, सचिव, एमडी और निर्णय लेने वाले अधिकारियों पर तय होनी चाहिए। उनके वेतन से मुआवजा वसूला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी था, तब क्रूज संचालन की अनुमति किसने दी? इन सवालों जवाब सामने आने चाजिए।
