मध्य प्रदेश में पुलिस और सियासत के टकराव का मुद्दा अब खुलकर सामने आ गया है। पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी द्वारा एक पुलिस अधिकारी को धमकाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसी घटनाक्रम को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पुलिस अधिकारियों के नाम खुला पत्र लिखते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सत्ता का दबाव कानून पर भारी

पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि एक विधायक द्वारा आईपीएस अधिकारी को धमकाने की घटना केवल एक व्यक्ति का व्यवहार नहीं, बल्कि उस माहौल का संकेत है जहां सत्ता का दबाव कानून और संविधान पर हावी होता दिख रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।

नेताओं के सामने नरम, आम लोगों पर सख्त क्यों?

उन्होंने पुलिस से सीधा सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां हैं, जिनमें प्रशिक्षित और सशक्त पुलिस अधिकारी रक्षात्मक नजर आते हैं। पटवारी ने कहा कि नेताओं के सामने पुलिस की आवाज धीमी क्यों पड़ जाती है, जबकि आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र सख्त दिखाई देता है।

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पुलिस पर दबाव और खामोशी खतरनाक

पत्र में यह भी कहा गया कि कई मामलों में सत्ताधारी दल के नेता पुलिस पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्रतिक्रिया अक्सर सीमित या शांत रहती है। उन्होंने IPS Association के पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें आक्रोश से ज्यादा बेबसी झलकती है।

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संविधान को सर्वोपरि मानें

पटवारी ने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे किसी व्यक्ति या सरकार नहीं, बल्कि संविधान को सर्वोच्च मानकर काम करें और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखेगी, तो आम लोगों का भरोसा डगमगा जाएगा।



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