मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानि एमपीआइडीसी एक बार फिर से ग्वालियर को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा रहा है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 09 May 2026 01:40:30 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 May 2026 01:41:05 PM (IST)

ग्वालियर बनेगा देश का नया 'टेक्सटाइल हब'... बड़ी कंपनियां कर सकती हैं निवेश, लौटेंगे जेसी मिल वाले सुनहरे दिन
दिल्‍ली में कारोबारियों से संवाद करतीं एमपीआइडी की डायरेक्टर अनीषा श्रीवास्‍तव। सौजन्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर का टेक्सटाइल के साथ ऐतिहासिक नाता रहा है। जेसी मिल और ग्वालियर रेयान जैसी मिलों ने कभी शहर को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई थी। हालांकि समय के साथ जेसी मिल और रेयान की मिलें बंद होने से यह पहचान खो गई है। लेकिन अब मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानि एमपीआइडीसी एक बार फिर से ग्वालियर को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा रहा है।

ब्लैकबेरी व वेलेंसिया अपैरल्स लगा सकती है इकाई

इन प्रयासों से ब्लैकबेरी व वेलेंसिया अपैरल्स जैसी कंपनियां अपनी इकाई लगा सकती हैं। एमपीआइडीसी ने हाल ही में टेक्सटाइल एवं गारमेंट सेक्टर में निवेश अवसर विषय पर एक इंटरेक्टिव आउटरीच सेशन कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल एसोसिएशन दिल्ली, ओखला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों सहित 60 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से ब्लैकबेरीज, वेलेंसिया अपैरल्स नोएडा और ट्राइबर्ग जैसे प्रतिष्ठित उद्योग समूहों की सहभागिता रही।

ग्वालियर-चंबल: इन्फिनिट पासिबिलिटीज का केंद्र

एमपीआइडीसी की कार्यकारी निदेशक अनीशा श्रीवास्तव ने औद्योगिक भूमि, निवेश प्रोत्साहन योजनाओं और सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली की जानकारी साझा की। उन्होंने इंफिनिट पासिबिलिटीज की अवधारणा के तहत बताया कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र क्यों वस्त्र उद्योग के लिए सबसे अनुकूल है। इस आउटरीच सेशन का प्रभाव धरातल पर भी दिखने लगा है। दिल्ली और नोएडा के कई उद्योगपतियों ने मोहना और गुरावल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा करना शुरू कर दिया है। निवेशकों ने वहां की अधोसंरचना और लाजिस्टिक कनेक्टिविटी को बारीकी से परखा है।

इन औद्योगिक क्षेत्रों पर फोकस

नए विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों मोहना, गुरावल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन क्षेत्रों में टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट की बड़ी इकाइयां लगाने के लिए देशभर के निवेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और वहां उपलब्ध संसाधन गारमेंट उद्योग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

टेक्सटाइल हब बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

  • ग्वालियर पहले टेक्सटाइल उद्योग के लिए जाना जाता था। ऐसे में यहां के लोग इससे परिचित हैं और इन उद्योगों के लिए संभावनाओं के साथ साथ मैन पावर भी आसानी से मिल जाएगा। ऐसे में एक बार फिर ग्वालियर चंबल में टेक्सटाइल हब बन सकता है। टेक्सटाइल हब बनने से न केवल औद्योगिक विकास होगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
  • शहर से कुछ किलोमीटर पर ही एमपीआइडीसी 210 हैक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। यहां पर टेक्सटाइल हब बनाने के लिए पूरी संभावनाएं हैं। क्योंकि यहां पर न केवल हाइवे की सुविधा है, बल्कि रेल मार्ग भी निकला है।

एमपीआइडीसी की डायरेक्टर ने कहा…

– दिल्ली में टेक्सटाइल एसोसिएशन दिल्ली, ओखला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया है और टेक्सटाइल हब की संभावनाओं के बारे में बताया है और यहां पर निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। ऐसे में कई उद्योगपतियों ने यहां पर रुचि दिखाई है और नए विकसित हो रहे मोहना औद्योगिक क्षेत्र की विजिट भी की है। यह प्रयास इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ग्वालियर में पहले भी जेसी मिल व रियान जैसी टेक्सटाइल मिलें थी।-अनीषा श्रीवास्तव, निदेशक एमपीआइडीसी ग्वालियर



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