केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच आधिकारिक कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया और शिष्टाचार का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में केंद्र ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, मंत्रालयों और विभागों को पत्र भेजकर कहा है कि सांसदों और विधायकों के साथ संवाद एवं कार्यवाही के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन हर स्तर पर अनिवार्य रूप से कराया जाए। जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच टकराव जैसी स्थिति बनी। ऐसे घटनाक्रम शासन-प्रशासन के लिए असहज माहौल पैदा करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए DoPT ने पहले जारी दिशा-निर्देशों को दोबारा लागू करने और उनके पालन पर जोर दिया है।

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निर्देश में कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों को उनके कर्तव्यों, जिम्मेदारियों और जनप्रतिनिधियों के प्रति व्यवहार संबंधी नियमों को लेकर संवेदनशील बनाया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सांसदों एवं राज्य विधानमंडल के सदस्यों से जुड़े मामलों में संवाद, जवाब और कार्रवाई समयबद्ध एवं सम्मानजनक तरीके से हो। DoPT ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए हैं कि इन दिशा-निर्देशों को राज्य, संभाग और जिला स्तर तक सभी अधिकारियों तक पहुंचाया जाए, ताकि जमीनी स्तर पर भी इनका प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि इन निर्देशों के अनुपालन की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई जाए। विभाग के अनुसार यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और इसका उद्देश्य प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद बनाए रखना है। 

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