नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सालों से कागजों में चल रहे ग्वालियर के रोप-वे प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर उम्मीद जागी है। 2007 से नगर निगम की ओर से प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले अलग-अलग कारणों से आवंटित हो चुकी जमीन निरस्त भी हो चुकी है।

3300 वर्ग मीटर की है जमीन की मांग

अब नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय की ओर से कलेक्टर रुचिका चौहान को पत्र लिखकर रोप-वे के लिए किले पर अपर टर्मिनल के लिए छह हजार वर्गमीटर और लोअर टर्मिनल के लिए नई जगह चिह्नित कर 3300 वर्ग मीटर जमीन की मांग की है।

पूर्व में इस जमीन का निश्शुल्क आवंटन किया गया था इसी कारण वही हवाला पत्र में देते हुए रोप-वे के लिए इस बार भी राजस्व की ओर से निश्शुल्क जमीन की मांग की गई है। रोप-वे प्रोजेक्ट को लेकर कारण भी रखे गए हैं जिसमें रोप वे प्रोजेक्ट आने के बाद किले पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और वर्तमान में किले पर जाने का मार्ग भी संकरा है।

रोप-वे प्रोजेक्ट वर्ष 2007 से है प्रस्तावित

आयुक्त ने पत्र में लिखा है कि नगर निगम के माध्यम से रोप-वे प्रोजेक्ट वर्ष 2007 से प्रस्तावित है। जिस कारण रोप-वे निर्माण के लिए ग्वालियर दुर्ग पर अपर टर्मिनल निर्माण को ग्राम आहूखानाकलां सर्वे क्रमांक 171/1 ग्वालियर शहर में स्थित ग्वालियर दुर्ग तक पर्यटकों के सुगम आवागमन के लिए ग्वालियर 177/2, 777/3 रकबा 4000 वर्गमीटर भूमि कार्यालय कलेक्टर जिला ग्वालियर के आदेश अनुसार निश्शुल्क आवंटित की गई थी।

लोअर टर्मिनल के लिए बारादरी फूलबाग निगम स्वामित्व की भूमि चिह्नित की गई थी। मैसर्स बालाजी दामोदर रोप-वे इंफ्रा प्रायवेट लिमिटेड द्वारा फूलबाग से ग्वालियर दुर्ग पर पहुंचने के लिए पीपीपी अंतर्गत नगर निगम ग्वालियर 2008 और 2018 में अनुबंध किया गया था।

दीवार को खतरा होने से स्थल निरस्त किया जाकर वैकल्पिक स्थान प्रस्तावित किया गया, जिसके संबंध में कलेक्टर के आदेश से आगामी वर्षों में अपर टर्मिनल के लिए चिह्नित भूमि से किले के अपर टर्मिनल को 6000 वर्गमीटर एवं लोअर टर्मिनल के लिए ग्राम आहुखाना खुर्द के सर्वे क्र. 21/2/1, 21/2/2, 22/2 में से 3300 वर्गमीटर भूमि आरक्षित की गयी है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा नजूल निर्वतन अधिनियम तहत प्रीमियम एव भू-भाटक की गणना कर रुपये 17.44 करोड़ की मांग की गई है।

क्यों रोप-वे आवश्यक: यह बताए कारण

किले तक वर्तमान में पहुंचने के लिए संकरा मार्ग है, काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते है। रोप-वे प्रोजेक्ट के क्रियान्वित होने से ग्वालियर वाले पर्यटकों में अधिक वृद्धि होगी।

रोप-वे प्रोजेक्ट में पहले निश्शुल्क भूमि आवंटित की गई थी, परंतु भूमि उपयुक्त नहीं होते निरस्त किया गया है जो निश्शुल्क आवंटित की गई थी, उसके स्थान पर निरस्त किया गया था। वर्तमान में अपर टर्मिनल के लिए पूर्व आवंटित भूमि जिसका भूमि का आवंटन चाहा गया है। लोअर टर्मिनल के लिए नवीन स्थल का चिन्हांकन किया गया है।

प्रोजेक्ट पर एक नजर

  • कितनी लागत से था प्रस्तावित: 127 करोड़
  • कितना लंबा था प्रस्तावित: 1.88 किमी
  • तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह ने किया भूमिपूजन: 10 जनवरी 2010
  • पर्यावरण एनओसी मिली लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचा- 28 जुलाई 2015
  • काम रोक दिया गया: 2019
  • अपर टर्मिनल का स्थान बदलाव उरवाई गेट किया- 2021
  • केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने रोप-वे की घोषणाा की- 2022



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