जहां एक ओर 44 डिग्री की भीषण गर्मी में लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं धर्मनगरी उज्जैन में एक संत की कठिन तपस्या लोगों को हैरान कर रही है। राम जनार्दन मंदिर के सामने स्थित नारायण-नारायण गोसेवा आश्रम में बाबा भरत दास जी, जिन्हें लोहा लंगड़ी वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों अग्नि तप साधना कर रहे हैं। उनकी तपस्या को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

 

सुलगते कंडों और जलती अग्नि के बीच करते हैं साधना

जानकारी के अनुसार, बाबा भरत दास प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चारों ओर सुलगते कंडों के बीच बैठकर नारायण-नारायण का जाप करते हैं। साधना के दौरान सिर पर भी जलती अग्नि के कंडे रखे जाते हैं। भीषण गर्मी और आग की तपिश के बीच शांत मुद्रा में बैठकर जाप करना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आत्मबल का प्रतीक बन गया है। यह साधना बसंत पंचमी से गंगा दशमी तक लगातार की जाती है।


 

तपस्या के दौरान नहीं करते जल या आहार ग्रहण

बाबा भरत दास की तपस्या को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण बना हुआ है। बताया जाता है कि तपस्या के दौरान वे किसी प्रकार का आहार या जल ग्रहण नहीं करते। प्रतिदिन चार घंटे तक अग्नि के बीच बैठकर साधना करना लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है। बाबा हर वर्ष प्रचंड गर्मी में इसी प्रकार विश्व कल्याण और शांति के लिए महाकाल शिव की आराधना करते हैं।

 

इस प्रकार होती है धुनी रमाने की प्रक्रिया

तपस्या शुरू करने से पहले बाबा भरत दास उस स्थान पर बैठते हैं जहां धुनी रमाई जाती है। इसके बाद उनके चारों ओर उपलों का घेरा बनाया जाता है। फिर एक जलता हुआ उपला उस घेरे में रखा जाता है, जिससे सभी उपले धीरे-धीरे सुलगने लगते हैं। धुएं और भीषण गर्मी के बीच बाबा अपने इष्ट भगवान के मंत्रों का जाप करते रहते हैं। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत और आस्था से जुड़ा अनुभव बन जाता है।


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श्रद्धालु मान रहे आत्मसंयम और विश्वास की मिसाल

सेवादार गेमेश प्रजापति ने बताया कि जहां सामान्य व्यक्ति कुछ मिनट धूप में खड़ा नहीं रह पाता, वहीं बाबा घंटों तक अग्नि के बीच बैठकर साधना करते हैं। श्रद्धालु इसे केवल तपस्या नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और आत्मसंयम की पराकाष्ठा मान रहे हैं। बाबा की साधना को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।

 

सिंहस्थ में भी दिखाई देते हैं ऐसे तपस्वी

धार्मिक नगरी उज्जैन में इस प्रकार की तपस्या अधिकतर सिंहस्थ के दौरान देखने को मिलती है। इस अवसर पर कई ऐसे संत यहां पहुंचते हैं, जो विभिन्न प्रकार की कठोर साधना कर भगवान की आराधना करते हैं। कोई वर्षों तक एक हाथ नीचे नहीं करता तो कोई एक पैर पर खड़े होकर तप करता है। धार्मिक नगरी में इस तरह की तप आराधना को आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की आहट से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में तपस्वी उज्जैन पहुंचेंगे।



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