उज्जैन में शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर एक अनोखा और प्रेरणादायक आयोजन देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी द्वारा फ्रीगंज स्थित घास मंडी चौराहे पर विशेष श्रमिक सम्मान अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के तहत तपती गर्मी में मेहनत करने वाले 150 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों का सम्मान कर उन्हें रोजमर्रा के काम आने वाले लोहे के औजार वितरित किए गए।

हार पहनाकर किया श्रमिकों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मजदूरों का हार पहनाकर स्वागत और सम्मान किया गया। इसके बाद उन्हें गैती, फावड़ा, तगारी, करनी सहित अन्य जरूरी लोहे के औजार दिए गए। आयोजन में श्रमिकों के लिए स्वल्पाहार की भी व्यवस्था की गई थी। सम्मान और सहयोग पाकर मजदूरों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।

‘अब औजार किराए पर नहीं लेने पड़ेंगे’

श्रमिक महिला फूलबाई ने बताया कि पहले उन्हें काम करने के लिए औजार किराए पर लेने पड़ते थे, जिससे उनकी दिहाड़ी का हिस्सा खर्च हो जाता था। उन्होंने कहा कि अब यह सहयोग मिलने से उनकी पूरी मजदूरी बच सकेगी और काम करने में भी आसानी होगी।

प्रधानमंत्री से मिली प्रेरणा – कृष्णा गुरुजी

कृष्णा गुरुजी ने बताया कि इस अभियान की प्रेरणा उन्हें उस समय मिली, जब देश के प्रधानमंत्री ने राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों का सार्वजनिक सम्मान किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को जिस तरह सम्मान दिया गया, उसी से प्रेरित होकर उन्होंने शनि जयंती को श्रमिक सम्मान और मानव सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया।

‘श्रमिकों में बसता है शनि देव का स्वरूप’

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि शनि देव कर्म, श्रम और न्याय के प्रतीक हैं। तपती धूप में मेहनत करने वाले मजदूरों में साक्षात शनि देव का स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “शनि जयंती पर श्रमिकों के श्रम का सम्मान करना ही सच्ची शनि साधना है।”

सेवा और सहयोग को बताया सच्ची साधना

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि शास्त्रों में शनि देव को कर्मप्रधान ग्रह माना गया है। श्रमिकों, सेवकों, बुजुर्गों और मेहनतकश वर्ग की सहायता करना शनि कृपा पाने का श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक पर्वों को पूजा-पाठ के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और मानव सेवा से जोड़ा जाए, तो उनका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

लोहे के औजार बांटने का बताया महत्व

कृष्णा गुरुजी के अनुसार लोहा शनि देव से संबंधित धातु माना जाता है। इसलिए जरूरतमंद श्रमिकों को लोहे के औजार देना शास्त्रसम्मत होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी बेहद उपयोगी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष शनिचर अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बना है, जिससे इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया।

ये भी पढ़ें- Bhojshala Case Live: हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार; मुस्लिम पक्ष जा सकता है सुप्रीम कोर्ट; धार में जश्न

‘श्रमिकों की मुस्कान में दिखे शनिदेव’

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि श्रमिकों के चेहरों की मुस्कान में उन्हें साक्षात शनिदेव के दर्शन हुए। कार्यक्रम में भाजपा नगर अध्यक्ष संजीव अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, योगेश बजाज, मनीष बजाज, राजेश अग्रवाल, राकेश बजाज, तृप्ति बजाज, भारती मंडलोई सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

समाज को दिया सेवा और सम्मान का संदेश

कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान के जरिए समाज को यह संदेश दिया गया कि धार्मिक पर्वों को केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें श्रम सम्मान, आत्मनिर्भरता, सामाजिक सहयोग और मानव सेवा से जोड़ना ही आधुनिक समय की सच्ची आध्यात्मिकता है।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *