डागर परिवार की बहू को लेकर पांच साल पहले तकिया मजिस्द के पास हुई हत्या मामले का कोर्ट ने फैसला सुना दिया। तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। एक आरोपी की जेल में मौत हो चुकी थी। एक अब तक फरार है। 9 मई 2017 को लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले अनिल डागर के भाई बबलू उर्फ संतोष डागर की चारधाम मंदिर मार्ग तकिया मस्जिद के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बबलू के साथी गुरुचरण को जमकर पीटा गया था।

घटनाक्रम के बाद गोली मारने वालो में दिलीप कोरट, अमर सारसवाल, ओम सारसवाल, कालू सारसवाल और रोहित सरसवाल का नाम सामने आया था। दानीगेट पर रहने वाले चार आरोपियों को महाकाल पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। हत्याकांड के बाद से रोहित फरार चल रहा है। पांच वर्षों तक चली सुनवाई के बाद पंचम अपर सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह ने ओम, दिलीप और अमर को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उपसंचालक (अभियोजन) डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि मामले में शासन की ओर से पैरवी नितेश कृष्णन एडीपीओ द्वारा की गई।

ये भी पढ़ें- सोशल मीडिया से हटाएं हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग के विवादित लिंक, 48 घंटों दिया समय

कालू की जेल में हुई मौत

हत्याकांड के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के साथ कालू सरसवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहां सालभर बाद कालू की मौत हो गई थी। परिजनों ने डागर परिवार पर जेल में हत्या करवाने का आरोप लगाया था, लेकिन जेल प्रशासन ने हार्ट अटैक से मौत होने की बात कही थी।

मार्च में हुई थी रंजिश

डागर परिवार और सरसवाल परिवार में काफी अच्छे संबंध थे। मार्च 2017 में अनिल डागर की पत्नी लापता हो गई थी। डागर परिवार ने कालू सरसवाल के भाई पवन पर अपहरण का आरोप लगाया था, जिसके बाद से दोनों परिवारों में दुश्मनी हो गई थी। इसके चलते बबलू उर्फ संतोष की हत्या की गई थी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *