मकर संक्रांति का पावन पर्व उज्जैन में आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कल के बाद आज भी शिप्रा नदी के घाटों पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट सहित अन्य स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने शिप्रा नदी में पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

इस दौरान रामघाट के पुजारी पंडित आनंद जोशी लोटा वाला’ ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर शिप्रा स्नान का विशेष महत्व है, जिसे लेकर दूर-दराज से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। पावन स्नान को लेकर प्रशासन और नगर निगम द्वारा घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात रहे, जिससे स्नान शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ। घाट क्षेत्र में पूरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। श्रद्धालु जयकारों के साथ पर्व की खुशियां मनाते नजर आए। वहीं दूसरी ओर शहर में पतंगबाजी का भी खास उत्साह देखने को मिला, जहां सुबह से ही पतंग प्रेमी छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाते दिखाई दिए। मकर संक्रांति के इस पर्व ने शहर को धार्मिक आस्था और लोक उत्सव के रंग में रंग दिया।

ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 भोपाल में आज, सीएम डॉ. यादव होंगे शामिल

सर्वार्थ सिद्धि योग

इस वर्ष मकर संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग है। साथ ही अश्विनी और अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव है। विशेष बात यह है कि सूर्य के साथ-साथ मंगल, बुध और शुक्र का भी कुछ ही दिनों में राशि परिवर्तन होगा, जिससे यह संक्रांति और अधिक फलदायी मानी जा रही है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान, तिल का दान, तिल स्नान और तिल के लड्डू का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चावल को देव अन्न माना गया है, जबकि मूंग इस ऋतु की पहली फसल होती है। तिल दान को उन्नति, समृद्धि और सुख-शांति से जोड़ा गया है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या पितृ दोष का प्रभाव है, वे तांबे के कलश में काले तिल भरकर, उस पर स्वर्ण रखकर वैदिक ब्राह्मण को दान किया। इससे कार्यों में प्रगति और पारिवारिक संबंधों में सुधार होता है। महिलाओं के लिए भी इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। महिलाएं वस्त्र, सुहाग सामग्री और अन्न का दान करती हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों और गरीब परिवारों को भोजन कराना भी श्रेष्ठ पुण्य माना।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *