मध्य प्रदेश के उज्जैन में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच जिला प्रशासन गरीब और जरूरतमंदों को राहत देने के लिए एक्टिव है। नानाखेड़ा और दुधतलाई स्टेशन रोड स्थित रैन बसेरे के रिएलिटी चेक में लोगों के ठहरने की व्यवस्था, साफ-सुथरा बिस्तर, अलाव और इलेक्ट्रिक हीटर की व्यवस्था सहित तमाम इंतजाम मिले।

पिछले कई दिनों से ठंड-शीतलहर और कोहरे के ट्रिपल अटैक से उज्जैन मे जनजीवन बेहाल है। कड़ाके की सर्दी और ठंडी हवाओं के चलते एक तरफ जहां लोग घरों में रहने पर मजबूर हैं। वहीं, दूसरी तरफ घने कोहरे की वजह से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो रहा है। सर्दी के सितम से लोग बेहाल दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में शीतलहर को देखते हुए उज्जैन में स्कूलों की छुट्टी भी कर दी गई है।

ऐसे में अब कलेक्टर रोशन कुमार सिंह रातों में ग्राउंड जीरो पर निकलकर सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे न सोए और ठंड से किसी तरह की जनहानि ना हो। इस ठंड और शीतलहर में लोगों की रात कैसे बीत रही है….? कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने रविवार रात्रि को नानाखेड़ा बस स्टैंड और दूधतलाई स्थित नगर निगम द्वारा संचालित मुख्यमंत्री आश्रय स्थल (रैन बसेरे) का औचक निरीक्षण करते हुए आधी रात को सरकार के इंतजामों के साथ-साथ लोगों की परेशानियों को भी जानने की कोशिश की। निरीक्षण के दौरान रैन बसेरों में कंबल, हीटर और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद पाई गईं।

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आम लोगों से भी की बातचीत

कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस दौरान रैन बसेरो में रह रहे लोगों से भी चर्चा की। जिस पर यहां पर ठहरे हुए व्यक्ति ने बताया कि इस भीषण ठंड में सरकार द्वारा अच्छा इंतजाम किया गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बहुत ही बेहतरीन व्यवस्था की है। वहीं, रैन बसेरे की केयरटेकर ने बताया कि रैन बसेरे में साफ-सुथरे बिस्तर और कंबल का इंतजाम है। साथ ही साथ ठंड से बचने के लिए लकड़ी का अलाव और इलेक्ट्रिक हीटर की भी व्यवस्था की गई है।

अलाव तापते दिखाई दिए कुछ लोग

भीषण ठंड से बचने के लिए शहर में जगह-जगह पर लोग अलाव तापते दिखाई दिए। साथ ही ठंड से राहत पाने के लिए लोग चाय का सहारा भी लेते दिखाई दिए। कुछ लोग खुले आसमान के नीचे भी बैठे हुए दिखाई दिए। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मैं इस बात को सुनिश्चित करने निरीक्षण पर निकला था कि किसी भी व्यक्ति को ठंड से किसी तरह का नुकसान ना हो। जो लोग खुले में रह रहे हैं उन्हें रैन बसेरे तक पहुंचाया जा रहा है।



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