मेरी 85 वर्षीय मां के पैरों में दर्द रहता है, लेकिन इसके बावजूद भी वह प्रतिदिन बाबा महाकाल के दर्शन करने मंदिर जाती है। कभी बैरिकेड तो कभी नंदी हॉल से वह बाबा महाकाल के दर्शन तो करती हैं, लेकिन हर बार उनकी इच्छा यही रहती है कि वह भी गर्भगृह में पहुंचकर बाबा महाकाल का पूजन अर्चन और दर्शन कर सकें, लेकिन जब उन्हें गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलता तो वे मुझ पर भी नाराज हो जाती हैं और ऐसी व्यवस्था को कोसने लगती हैं। यह बात उज्जैन-आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया ने जिला विकास एवं समन्वय तथा निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में कही।

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देश-विदेश से बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की बस यही कामना होती है कि वह गर्भगृह में जाकर भगवान का स्पर्श कर पाए, लेकिन श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के नियम इतने कठोर हैं कि किसी को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता है। कलेक्टर और श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह को चाहिए कि वह गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए भी कुछ ऐसी व्यवस्था करें जिससे कि आम श्रद्धालु भी बाबा महाकाल को स्पर्श करने के साथ ही उनका पूजन अर्चन कर सकें। भले ही इसके लिए स्लॉट बुकिंग करना पड़े या अन्य को कोई उपाय करना पड़े लेकिन आम श्रद्धालुओं की भावना को भी ध्यान रखना चाहिए।

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2023 से बंद हैं गर्भगृह में प्रवेश

4 जुलाई 2023 से श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगा दी थी, यह रोक लगाने का कारण स्पष्ट था कि प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आ रहे थे। इसमें से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गर्भगृह में भी पहुंचते थे। श्रद्धालुओं के गर्भगृह में पहुंचने से जहां शिवलिंग के क्षरण का खतरा था वहीं बैरिकेड से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को भी बाबा महाकाल का शिवलिंग ठीक से दिखाई नहीं देता था यही कारण है कि गर्भ गृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।



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