नगर निगम के महापौर चुनाव 2022 के मामले में न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। प्रधान जिला न्यायाधीश पी.सी. गुप्ता की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए प्रत्यर्थी क्रमांक-1 (महापौर), प्रत्यर्थी क्रमांक-4 (निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान) और प्रत्यर्थी क्रमांक-5 (जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग आॅफिसर) की ओर से लगाए गए आवेदनों को खारिज कर दिया है। अब इस चुनाव याचिका पर अदालत में आगे की सुनवाई होगी।
महापौर चुनाव 2022 को लेकर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस अहम फैसले को सुनाते हुए चुनाव याचिका को सुनवाई के काबिल माना है। अब इस फैसले से महापौर की कुर्सी पर संकट गहरा सकता है। दरअसल ये फैसला उज्जैन नगर निगम महापौर चुनाव 2022 से जुड़े विवाद को लेकर आया है। फैसले से सियासी हलचल भी तेज है। प्रधान जिला न्यायाधीश की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए महापौर, निर्दलीय प्रत्याशी के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। इस फैसले से अब चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।
दरअसल ये सारा विवाद 60 वैध मतों को लेकर है जो अनुचित रूप से अस्वीकृत कर दिए गए थे। याचिका के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले तो आश्वासन दिया कि यदि आंकड़े गलत पाए गए तो दोबारा से गिनती होगी। लेकिन बाद में मांग नहीं मानी गई और कोई गिनती नहीं कराई गई। सबसे गंभीर और बड़े आरोप मतदान केंद्र क्रमांक 274 को लेकर है। दावा किया गया है कि वहां परमार को 277 मत मिले थे, लेकिन रिकॉर्ड में 217 मत दर्शाए गए। जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था। महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार ने परिणाम को चुनौती दी है।
नतीजों के अनुसार परमार को 1,33,317 तो भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल को 1,34,240 मत मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी परमार ने आरोप लगाया कि मतगणना के बाद घोषित आंकड़े असत्य थे और उन्होंने लिखित रूप से पुनर्मतगणना की मांग की थी। महापौर मुकेश टटवाल, निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर ने आवेदन देकर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की थी। अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया है और कहा है कि साक्ष्यों के आधार पर ही असलियत का पता लगेगा। अदालत ने साफ किया कि बिना साक्ष्य के यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि याचिका झूठी है या निराधार है। लिहाजा इस फैसले के बाद महापौर की कुर्सी पर सियासी संकट गहराने लगा है।
क्या है मामला?
मामले मे पैरवी कर रहे सीनियर हाईकोर्ट एडवोकेट रसिक सुगंधी ने बताया कि 17 जुलाई 2022 को संपन्न हुए उज्जैन नगर पालिक निगम के महापौर चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार (याचिकाकर्ता) ने चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। याचिका में आरोप है कि मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारी ने शाम को याचिकाकर्ता को 1,33,317 और प्रत्यर्थी क्रमांक-1 (भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी) को 1,34,240 मत प्राप्त होने की घोषणा की थी, जिससे याचिकाकर्ता 923 मतों से पराजित हुआ। असत्य मतों की घोषणा का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने तुरंत लिखित में पुन: मतगणना (रिकाउंटिंग) की मांग की थी।
याचिका के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले आश्वस्त किया था कि आंकड़े गलत पाए जाने पर रिकाउंटिंग होगी, लेकिन बाद में सत्ता दल के दबाव में आकर मांग खारिज कर दी गई और प्रारूप 21-क में जानबूझकर असत्य इन्द्राज किए गए। याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी है कि मतदान केंद्र क्रमांक 274 पर याचिकाकर्ता को 277 मत मिले थे, लेकिन उसे 217 मत दर्शाकर 60 वैध मतों को अनुचित रूप से अस्वीकृत कर दिया गया। इस चुनाव याचिका (क्रमांक 02/2022) के खिलाफ प्रत्यर्थी क्रमांक-1, क्रमांक-4 और क्रमांक-5 ने आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत आवेदन (आई.ए. नंबर 2/22, 3/22 और 4/22) प्रस्तुत कर अदालत से इसे निरस्त करने की मांग की थी।
उनका तर्क था कि याचिका विधिक प्रावधानों के विपरीत है, इसमें वाद कारण का अभाव है, तथ्यों को छिपाया गया है और इसका सत्यापन सही नहीं है, इसलिए इसे प्रारंभिक तौर पर ही खारिज किया जाए। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सभी आवश्यक बिंदुओं का विस्तृत रूप से उल्लेख किया है और इसके समर्थन में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है।
न्यायालय ने कहा कि प्रत्यर्थियों द्वारा उठाई गई आपत्तियां प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं हैं और बिना साक्ष्य लिए इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता कि याचिका असत्य रूप से प्रस्तुत की गई है। इस आधार पर न्यायालय ने प्रत्यर्थी 1, 4 और 5 द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदनों (आई.ए. नंबर 02/22 से 04/22) को निरस्त कर दिया है।
