इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह थी कि आज बाबा महाकाल का भस्म से आलोकिक श्रंगार किया गया और मस्तक पर त्रिपुंड और वैष्णव तिलक लगाया गया।
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इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह थी कि आज बाबा महाकाल का भस्म से आलोकिक श्रंगार किया गया और मस्तक पर त्रिपुंड और वैष्णव तिलक लगाया गया।
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