देशभर में प्रत्येक त्योहार उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले मनाए जाने की परंपरा है। इसी कड़ी में गणतंत्र दिवस की शुरुआत भी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से की गई। यहां सुबह 4:00 बजे भस्म आरती में बाबा महाकाल को तीन रंगों का आकर्षक तिलक लगाकर शृंगार किया गया। साथ ही तीन रंगों की आकर्षक माला भी पहनाई गई। यहां भगवान महाकाल के ललाट पर चंदन से भगवा और सफेद रंग लगाया गया भांग से हरा शृंगार किया गया। मंदिर के शिखर को तीन अलग-अलग रंगों की लाइट से जगमगाया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती की गई। यहां पुजारियों ने देश के विकास की कामना की।

परम्परा अनुसार आज सुबह 4 बजे विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के पट खोले गए। बाबा को गर्म जल से स्नान करवाया गया। इसके बाद सुगंधित द्रव्य, इत्र लेपन, फलों के रस और पंचामृत से अभिषेक हुआ। विजया अर्थात भांग से बाबा का शृंगार किया गया। यहां बाबा के ललाट पर तिलक आकर्षक दिख रहा था। राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों का तिलक देखते ही बन रहा था। इसके बाद बाबा को भस्म रमाने की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्मी के पहले स्वेत वस्त्र ओढ़ाया गया। परम्परा अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से संत ने भस्म चढ़ाकर बाबा को भस्मीभूत किया। 

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भस्मारती का यह वह दृश्य था जिसे महिलाओं को देखने पर प्रतिबंध रहता है। इस दौरान महिलाएं घूंघट कर लेती है। भस्म चढ़ने के बाबा को आकर्षक वस्त्र पहनाए गए। चांदी के नर मुंडों की माला, गले में विशाल शेषनाग, रुद्राक्ष की माला, चांदी का मुकुट पहनाकर बाबा महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में सजाया गया। इसके बाद शुरू होती है आरती जिसे कहते है भस्मारती। डमरू, ढोल, नगाड़े, शंख ध्वनि, घण्टे घड़ियाल की मधुर आवाज के बीच, पुजारियों द्वारा मंत्रोचारण के साथ बाबा को आरती की गई। यही वह आरती होती है जिसे देखने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भक्त बाबा के दरबार पहुंचे थे।



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