अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज इन दिनों सिंहस्थ के कार्यों के निरीक्षण के लिए उज्जैन प्रवास पर हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि उज्जैन में कालनेमी (भेष बदलकर धोखा देने वाले) सक्रिय हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड में अभियान चलाकर सैकड़ों फर्जी संतों को जेल भेजा गया था, उसी तरह की सख्त कार्रवाई अब उज्जैन में भी की जाएगी।

महाराज ने कहा कि कुछ लोग विशेष धर्म से होने के बावजूद साधु का चोला ओढ़कर सनातन धर्म को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित कर पुलिस के हवाले किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत पर दाग लगता है तो पूरा समाज बदनाम होता है, इसलिए ‘कालदेवी ऑपरेशन’ चलाया जाएगा। इसमें जो संत नहीं हैं, उन्हें पकड़ा जाएगा और जेल भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सिंहस्थ कुंभ को बांग्लादेशियों से बचाना होगा।

‘साधु के वेश में गृहस्थी चलाना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं’


रवींद्र पुरी महाराज ने केवल बाहरी तत्वों ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो सनातन परंपरा के नाम पर पत्नी और बच्चों के साथ गृहस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधु के वेश में गृहस्थी चलाना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। संतों की परंपरा समाजसेवा और धर्म के निर्वाह के लिए है। अखाड़ा परिषद ऐसे फर्जी और मर्यादाहीन संतों को चिन्हित कर रही है और इस बार के कुंभ में उन्हें परिषद की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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‘संतों के पास आधार कार्ड और अखाड़े का पहचान पत्र जरूरी’


अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि यह अभियान सिंहस्थ कुंभ से पहले शुरू किया जाएगा। इसके तहत देशभर से आने वाले साधु-संतों की पहचान और सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले संतों के पास आधार कार्ड और संबंधित अखाड़े का पहचान पत्र होना अनिवार्य होगा। बिना पहचान वाले भगवाधारी लोगों की जांच की जाएगी।

ऐसे साधु सावधान हो जाएं-रवींद्र पुरी


रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि बीवी-बच्चों के साथ रह रहे साधु भी सावधान हो जाएं। संतों का कार्य परमार्थ, यज्ञ-अनुष्ठान करना और विद्यालय चलाकर गरीब बच्चों को शिक्षित करना है, न कि बीवी-बच्चों का पालन-पोषण करना। इसलिए जो साधु-संत गृहस्थ जीवन जी रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।



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