नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों दोषी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का भी आदेश पारित किया है।

नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों दोषी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश भी पारित किया है।

थाना कोतवाली क्षेत्र की नाबालिग पीड़िता 16 सितंबर 2024 को दोपहर करीब 3 बजे घर से रुपये लेकर मोहल्ले की दुकान पर सामान लेने जा रही थी। इसी दौरान गली के पास आरोपी नानका उर्फ शोएब खान ने पीड़िता को सामान लाने के बहाने अपनी गली में बुलाया। जब पीड़िता सामान देने उसके मकान की ओर गई, तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर जबरन मकान के अंदर खींच लिया। वहां पहले से मौजूद दूसरे आरोपी मोहसीन खान ने दरवाजा बंद कर दिया।

आरोप है कि शोएब ने पीड़िता के साथ मारपीट की, जबकि मोहसीन ने उसकी गर्दन पर चाकू रखकर धमकाया। इसके बाद शोएब ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। इसी दौरान सामान देने वाला दुकानदार वहां पहुंच गया, जिससे मोहसीन का झगड़ा हो गया। शोर सुनकर पीड़िता की मां और भाई भी मौके पर पहुंच गए और पीड़िता को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाकर घर ले आए। पीड़िता ने घर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी परिजनों को दी, जिसके बाद थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

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पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता तथा पाक्सो एक्ट की धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायालय, श्योपुर में हुई। माननीय श्रीमती बबीता होरा शर्मा, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश/अनन्य विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) ने मामले में 15 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम है और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, जो अत्यंत गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध है। ऐसे कृत्य समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न करते हैं, जिससे न केवल बच्चों बल्कि देश के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

न्यायालय ने आरोपी शोएब उर्फ नानका को आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 127(2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 351(3) बीएनएस में 5 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 115(2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं आरोपी मोहसीन खान को भी धारा 70(2) बीएनएस में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड, अन्य संबंधित धाराओं के तहत सजा के साथ-साथ धारा 25(1-बी)(बी) आयुध अधिनियम के अंतर्गत दंडित किया गया।

इसके अतिरिक्त न्यायालय ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश पारित किया, जो जुर्माने की राशि से अलग होगी। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रतिभा उमरैया एवं एडीपीओ रिचा शर्मा द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।



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