राजधानी भोपाल के शाहपुरा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर को पुलिस आयुक्त संजय कुमार के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया है। ठाकुर ने चोरी के खात्मा लग चुके एक प्रकरण में पांच दिन तक पूछताछ के नाम पर एक युवक को बिना लिखा पढ़ी हिरासत में रखा। पांचवें दिन आधी रात चोरी का संदेही युवक सीढ़ियों के सहारे थाने की छत पर पहुंचा और वहां से कूदकर फरार हो गया। 

इस मामले में थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर की बड़ी लापरवाही पाई गई है, क्योंकि संदिग्ध को बिना कागजी कार्रवाई के पांच दिन तक थाने में रखा। फरार होने पर उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करा दी, जिनका इस मामले में कोई लेनादेना नहीं था। इसकी शिकायत तत्कालीन पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा के पास हुई थी। जांच के बाद पुलिस आयुक्त संजय कुमार के निर्देश पर निलंबित किया गया है। थाना प्रभारी के निलंबन के बाद पूरा मामला सामने आया।

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जानकारी के अनुसार शाहपुरा थाना क्षेत्र में अगस्त 2025 में एक चोरी हुई थी। चोरी का खुलासा कई महीनों तक नहीं होने के कारण वर्ष के अंत में मामलों के खात्मे कार्रवाई के दौरान 12 दिसंबर 2025 को चोरी के उक्त मामले में भी खात्मा लगा दिया गया। इसके बाद जनवरी माह में चोरी का फरियादी शाहपुरा पुलिस से मिला और कहा कि एक युवक पर संदेह है, उससे पकड़कर पूछताछ की जाए तो मामला खुल सकता है। इसके बाद थाना प्रभारी के निर्देश पिछले महीने 15 जनवरी को शाहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक भानू गुर्जर, प्रधान आरक्षक सुरेंद्र यादव और आरक्षक बाबूलाल ने इंद्रा नगर मल्टी से 19 वर्षीय विजय उर्फ लड्डू पिल्लई को चोरी के संदेह में हिरासत में लिया। पुलिस ने उसे थाने के उस कमरे में रखा, जहां सीसीटीवी फुटेज नहीं लगे हैं, ताकि उससे गैरकानूनी तरीके से पूछताछ की जा सके। पुलिस पांच दिन तक उससे पूछताछ करती रही, लेकिन किसी भी प्रकरण में आरोपी नहीं बनाया। 19 जनवरी को दोपहर 3ः44 बजे विजय मौका देखकर सीढ़ियों के रास्ते छत पर पहुंचा। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब तक सुध ली, तब तक संदेही फरार हो गया। संदेही के थाने से फरार होने के बाद उसकी थाने के रोजनामचे में आमद दर्ज की गई। कुछ घंटे बाद उसकी थाने से फरारी दिखा दी गई। कागजों में इसी हेरफेर के कारण थाना प्रभारी निलंबित किए गए हैं। 

थाना प्रभारी ने खुद को बचाकर स्टॉफ को लपेट दिया

शाहपुरा पुलिस की इस कार्रवाई में पूरी लापरवाही थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर की सामने आई, लेकिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बजाए, एसआई जगन्नाथ परतेती और आरक्षक पुष्पेंद्र को जिम्मेदार बताते हुए निलंबित करा दिया गया। उक्त दोनों पुलिसकर्मी निलंबन के खिलाफ पुलिस आयुक्त के पास पहुंचे और थाने में हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद थाना प्रभारी के खिलाफ पुलिस आयुक्त ने जांच के निर्देश दिए थे। डीसीपी की जांच में पूरी लापरवाही थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर की सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। 



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