जिले के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल, नागौद से जुड़ा एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां पढ़ने वाली कुछ छात्राएं स्कूल की करीब 8 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर स्कूल से बाहर चली गईं लेकिन इस गंभीर घटना की भनक तक स्कूल प्रबंधन को नहीं लगी मामले का खुलासा तब हुआ, जब बाउंड्री लांघकर सड़क पर कूदती छात्राओं का वीडियो बुधवार देर शाम सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 

वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि छात्राएं बाउंड्री फांदते समय संतुलन खो बैठती हैं और नीचे गिर जाती हैं। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय के बाहर से मुख्य सड़क गुजरती है, जहां दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि स्कूल समय के दौरान छात्राओं का बाउंड्री कूदकर बाहर जाना केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि उनकी जान से खिलवाड़ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? लोगों का आरोप है कि छात्राओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही साफ झलक रही है। गेट पर निगरानी और परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होना, गंभीर चूक मानी जा रही है।

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मीडिया में मामला आने के बाद हरकत में अधिकारी

वीडियो वायरल होने और मीडिया में मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि मामले में प्राचार्य से चर्चा की जाएगी और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उचित प्रबंध कराने के निर्देश दिए जाएंगे। स्कूल के पीछे से बाउंड्री फांदकर बाहर जाना घोर लापरवाही है।

प्राचार्य ने दी सफाई

इस पूरे मामले पर विद्यालय की प्राचार्य विनीता श्रीवास्तव ने सफाई देते हुए कहा कि मुख्य गेट में ताला लगा हुआ था और उस समय स्कूल में प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। छात्राओं के बाउंड्री कूदकर बाहर जाने की जानकारी अब प्राप्त हुई है। आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।

लापरवाही या व्यवस्था की कमी?

हालांकि प्रबंधन की सफाई के बावजूद सवाल कायम है कि परीक्षा के दौरान छात्राएं स्कूल से बाहर कैसे निकल गईं और किसी भी शिक्षक या स्टाफ की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी। यह घटना न सिर्फ स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी स्कूलों में छात्र सुरक्षा की जमीनी हकीकत को भी उजागर करती है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीर कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।



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