मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट सफलता की नई नई कहानियां लिख रहा है। रविवार को एक और खुशी का दिन था। भारत में जन्मी पहली चीता मुखी ने तीन साल पूरे कर लिए हैं। ये प्रोजेक्ट की सफलता का बड़ा प्रतीक माना जा रहा है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट मप्र में सफल माना जा रहा है। प्रदेश में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है, इसका सीधा आशय है कि मप्र का वातावरण चीतों को भाने लगा है। नामीबिया से लाए गए चीतों के बाद भारत की धरती पर पहली चीता जन्मी थी, उसका नाम मुखी रखा गया था। 29 मार्च 2023 को ज्वाला नामक चीता ने उसे जन्म दिया था। आज 29 मार्च को उसने यहां तीन साल पूरे कर लिए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पर खुशी जताई है।
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चीता मुखी अपने शावकों के साथ
– फोटो : अमर उजाला
सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुनो से खुशखबरी! भारत की पहली चीता, ‘मुखी’, आज तीन साल की हो गई है। एक नन्ही शावक से एक आत्मविश्वासी मां बनने तक का उसका सफर, प्रोजेक्ट चीता की सफलता का एक सशक्त प्रतीक है। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा और बढ़ते आत्मविश्वास का मार्ग प्रशस्त करती है।
जीवन के संघर्ष से मां बनने तक का सफर
मुखी भारतीय वातावरण में बढ़ी होने वाली चीता है। मां ज्वाला की मौत के बाद उसके भाई-बहन तेज गर्मी के कारण जीवित नहीं रह पाए। ऐसे हालात में वन विभाग की टीम ने मुखी को बचाया और लगातार निगरानी में रखकर उसे पाला। समय के साथ मुखी ने खुद को पूरी तरह जंगल के माहौल में ढाल लिया है। वन अफसरों की मानें तो उसका व्यवहार इस बात का संकेत है कि कूनो का वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। मुखी ने 33 महीने की उम्र में नवंबर 2025 में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। मुखी अपने शावकों की देखभाल खुद कर रही है।
