उज्जैन सिंहस्थ 2028 को आने में भले ही अभी 2 वर्ष का समय शेष हो, लेकिन सिंहस्थ महापर्व निर्विघ्न रूप से संपन्न हो और किसी भी प्रकार का कोई संकट इस आयोजन के दौरान न आए, ऐसी मंगलकामना के साथ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने पीतांबरा मां बगलामुखी के धाम पहुंचकर माता का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद लिया और उसके बाद यज्ञ में मिर्ची से आहुतियां भी दीं।

मां बगलामुखी धाम के प्रमुख और भर्तृहरि गुफा के महंत रामनाथ महाराज ने बताया कि सिंहस्थ 2028 की सफलता के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज मां बगलामुखी धाम आए थे। यहां उन्होंने सबसे पहले माता का पूजन-अर्चन किया और उसके बाद मिर्ची यज्ञ में शामिल हुए। विशेष प्रयोजन के लिए होने वाले इस यज्ञ में 51 ब्राह्मण बटुक शामिल थे, जो विशेष मंत्रों के साथ यज्ञ में लाल मिर्च और सरसों से आहुतियां दे रहे थे।


मां बगलामुखी मंदिर में 10 महाविद्याओं का आह्वान करते हुए सिंहस्थ निर्विघ्न रूप से संपन्न हो, इसके लिए विशेष पूजा की गई। महंत रामनाथ महाराज ने बताया कि सिंहस्थ की सफलता के लिए कोई विघ्न न आए, इसलिए यह यज्ञ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे उज्जैन क्षेत्र में विभिन्न निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन निर्माण कार्यों के दौरान भी कोई विघ्न और आसुरी शक्तियों का प्रभाव न रहे, इसके लिए मंदिर में विशेष हवन कराया गया।

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हवन में विशेष मंत्रों के साथ आहुतियां डालकर विशेष प्रार्थना की गई। उन्होंने बताया कि मां बगलामुखी की पूजा और हवन से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे देश और समाज की रक्षा होती है।

मां बगलामुखी के आशीर्वाद के लिए हुआ यज्ञ

संत-महात्माओं ने मां बगलामुखी के समक्ष संकल्प लिया कि सिंहस्थ 2028 में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन मंगलमय हो और पूरा मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो। संतों ने बताया कि इस प्रकार के विशेष अनुष्ठान से वातावरण की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे बड़े धार्मिक आयोजनों की सफलता के लिए आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। संतों ने विश्वास जताया कि मां बगलामुखी के आशीर्वाद से सिंहस्थ 2028 ऐतिहासिक और भव्य रूप में संपन्न होगा, जिसमें देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु उज्जैन की आध्यात्मिक परंपरा का अनुभव करेंगे।



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