एतिहासिक रायसेन किले में तोप के कथित अवैध उपयोग और उससे जुड़ा विवादित वीडियो के वायरल होने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया। आयोग ने जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से जवाब-तलब किया है।

एनएचआरसी ने रायसेन कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के क्षेत्रीय निदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, हाल ही में रायसेन किले से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग किले की प्राचीर पर मौजूद ऐतिहासिक तोप का उपयोग करते और नारेबाजी करते दिखाई दिए थे।

इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे इलाके में विवाद की स्थिति बन गई थी और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर भी चिंता जताई गई थी। मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। आयोग ने माना है कि धरोहरों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुरक्षा में चूक सामने आती है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।

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सवाल: पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है?

साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि किले की सुरक्षा व्यवस्था क्या है और उस समय वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने क्या कार्रवाई की। इसके अलावा प्रशासन से यह भी जानकारी मांगी गई है कि घटना के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।

एनएचआरसी ने पुलिस अधीक्षक से भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह बताया जाए कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान कैसे की गई, उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई और मामले की वर्तमान स्थिति क्या है। वहीं, पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय निदेशक से किले की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और धरोहर संरक्षण से जुड़े उपायों की जानकारी देने को कहा गया है।  इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 



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