चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही राजधानी भोपाल पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब गई है। सुबह तड़के से ही शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर तरफ “जय माता दी” के जयकारे गूंजते रहे और लोगों में माता रानी के दर्शन को लेकर खास उत्साह नजर आया।
तड़के से मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब
नवरात्रि के पहले ही दिन सुबह जल्दी से श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे भीड़ और बढ़ती चली गई। शहर के बड़े मंदिरों में हालात ऐसे रहे कि लोगों को दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन आस्था इतनी मजबूत थी कि किसी ने शिकायत नहीं की और सभी श्रद्धा के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
विधि-विधान से हुई घटस्थापना, घर-घर शुरू हुई पूजा
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। लोगों ने शुभ मुहूर्त में अपने घरों में कलश स्थापना की और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू की। कई परिवारों ने पूरे नौ दिन व्रत रखने का संकल्प लिया है और सुबह-शाम पूजा कर माता रानी से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
भजन, आरती और सजावट से बना भक्तिमय माहौल
मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच माहौल पूरी तरह धार्मिक हो गया है। कई मंदिरों को आकर्षक फूलों और लाइटों से सजाया गया है, जिससे वातावरण और भी भव्य नजर आ रहा है। श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा कर रहे हैं और माता रानी का आशीर्वाद ले रहे हैं।
यह भी पढ़ें-भोपाल के हमीदिया अस्पताल में लापरवाही, मृत घोषित नवजात में दिखी हरकत, परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर खास ध्यान
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। मंदिरों के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है और ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो और श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन मिल सकें।
यह भी पढ़ें-गोमांस केस में आरोपी को जमानत मिलते ही बवाल, भोपाल में बजरंग दल का प्रदर्शन, निगम की निकाली अर्थी
नौ दिनों तक चलेगा आस्था का महापर्व
यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। हर दिन का अपना अलग महत्व होता है और श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। अंतिम दिन रामनवमी के रूप में मनाया जाएगा, जो इस पावन पर्व का समापन होगा।
