हिमालयी क्षेत्रों में जारी बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने मध्यप्रदेश को कड़ाके की ठंड की चपेट में ले लिया है। उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से गिरा है। मंदसौर में रात का न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जहां ओस की बूंदें जमती नजर आईं। मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम की तेज रफ्तार और उत्तरी हवाओं के कारण ठंड का असर और बढ़ गया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से होती हुई यह सर्द हवा सीधे मध्यप्रदेश पहुंच रही है, जिससे शीतलहर और घना कोहरा दोनों की स्थिति बनी हुई है।

इन जिलों में शीतलहर, कई संभाग कोहरे की चपेट में

भोपाल, इंदौर, रीवा, मऊगंज, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, सीहोर और सिवनी में शीतलहर चल रही है। वहीं ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में घना कोहरा छाया हुआ है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, सीधी और सिंगरौली में विजिबिलिटी काफी कम दर्ज की गई। भोपाल, शाजापुर, सीहोर और राजगढ़ के लिए मौसम विभाग ने कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है।

रेल यातायात प्रभावित, ट्रेनें घंटों लेट

कोहरे का सीधा असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली कई ट्रेनें 4 से 5 घंटे की देरी से चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस, शताब्दी, झेलम और सचखंड समेत एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनों की टाइमिंग बिगड़ गई है।

रात के साथ दिन भी ठिठुराने वाले

प्रदेश में सिर्फ रातें ही नहीं, बल्कि दिन भी ठंडे बने हुए हैं। रविवार को सीधी में अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री, पचमढ़ी और मलाजखंड में 20.8 डिग्री दर्ज किया गया। रीवा, दतिया, टीकमगढ़, ग्वालियर और सतना जैसे शहरों में भी दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा।

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मंदसौर सबसे ठंडा, भोपाल में 4.8 डिग्री

शनिवार-रविवार की रात में प्रदेश के कई शहरों में तापमान 5 डिग्री से नीचे चला गया। मंदसौर सबसे ठंडा रहा। शहडोल के कल्याणपुर, शाजापुर, रीवा, राजगढ़, पचमढ़ी और नौगांव में भी पारा 4 डिग्री के आसपास रिकॉर्ड किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री रहा, जबकि इंदौर से ज्यादा ठंड ग्वालियर में महसूस की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जमीन से करीब 12 से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम इस बार बेहद सक्रिय है। इसकी रफ्तार 213 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा दर्ज की गई है। यही तेज ऊंची हवाएं पहाड़ों की ठंड को मैदानी इलाकों तक पहुंचा रही हैं, जिससे ठंड का असर दोगुना हो गया है।

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आगे और बढ़ सकती है ठंड

मौसम विभाग का अनुमान है कि 30 दिसंबर को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में सर्द हवाओं की तीव्रता और बढ़ने से ठंड का प्रकोप और तेज हो सकता है। इस सीजन में नवंबर और दिसंबर दोनों महीनों में ठंड ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं। भोपाल में नवंबर के दौरान लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर रहा। दिसंबर में भी कई शहरों में तापमान 5 डिग्री से नीचे जा चुका है। मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी प्रदेश में सबसे ज्यादा ठंडे महीने होते हैं। इस दौरान उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ मिलकर तापमान को तेजी से गिरा देते हैं। फिलहाल यही स्थिति मध्यप्रदेश में बनी हुई है।



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