मध्य प्रदेश में इस बार अप्रैल की शुरुआत ही बदले हुए मौसम के साथ हो रही है। तेज गर्मी के बजाय प्रदेश में अगले चार दिन यानी 9 अप्रैल तक आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम के साथ 7 अप्रैल से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने जा रहा है, जिससे मौसम का असर और बढ़ेगा।सोमवार को ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के करीब 24 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, मंडला, बालाघाट समेत कई जिले शामिल हैं, जहां तेज हवाओं के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है।


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पहले भी दिखा असर, ओले-आंधी ने बदला मिजाज

इससे पहले 4 और 5 अप्रैल को प्रदेश में मौसम ने तीखा रूप दिखाया। कई जिलों में ओलावृष्टि हुई और लगभग पूरे प्रदेश में आंधी-बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर, शिवपुरी, मंदसौर, भिंड, दतिया समेत कई जिलों में ओले गिरे, जबकि अन्य इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई।हवा की रफ्तार भी कई जगह खतरनाक स्तर तक पहुंची जबलपुर में 59 किमी/घंटा, सागर में 54 और बड़वानी में 50 किमी/घंटा तक दर्ज की गई।

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7 अप्रैल से नया सिस्टम होगा एक्टिव

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में लगातार एक्टिव सिस्टम की वजह से मौसम अस्थिर बना हुआ है। 7 अप्रैल से सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ कई इलाकों में तेज आंधी और बारिश की स्थिति पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में भी मौसम शांत नहीं रहेगा। कुछ जिलों में आंधी की रफ्तार 50 से 60 किमी/घंटा तक जा सकती है, जबकि बाकी हिस्सों में 30 से 40 किमी/घंटा की गति बनी रहेगी।

गर्मी के बीच राहत, लेकिन चिंता भी

आमतौर पर अप्रैल-मई में भीषण गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार बार-बार एक्टिव हो रहे सिस्टम की वजह से तापमान में गिरावट आई है। मार्च में जहां पारा 41 डिग्री के पार पहुंच गया था, वहीं अब मौसम ठंडा बना हुआ है। हालांकि, इस बदलते मौसम का असर फसलों पर भी पड़ रहा है। फरवरी और मार्च में कई बार ओले और बारिश से गेहूं, पपीता और केले की फसलों को नुकसान हुआ है।

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तापमान में उतार-चढ़ाव (डिग्री सेल्सियस)

खरगोन: 37.8 (सबसे गर्म)

खंडवा: 36.1

नर्मदापुरम: 35.5

जबलपुर/दमोह: 34.5

भोपाल: 33.4

इंदौर: 32.8

पचमढ़ी: 28.6 (सबसे ठंडा)

क्यों बदला मौसम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में एक साथ कई मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल, तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि प्रदेश में मौसम लगातार अस्थिर बना हुआ है।



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