मध्य प्रदेश की रिक्त हो रही तीन राज्यसभा सीटों के 18 जून को संभावित चुनाव में भाजपा द्वारा महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर उतारने से रोचक मोड़ आ गया है। भाजपा ने महेशन केवट को प्रत्याशी बनाकर पूरे देश और खासकर यूपी में सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस फैसले से प्रदेश के अति पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए वहां के प्रभावशाली निषाद-केवट समाज को भी साधने का प्रयास किया है। 

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार ऐसे समय मैदान में उतारा है, जब उसके पास सीधे तौर पर जीत के लिए आवश्यक संख्या नहीं है। इसके बावजूद उम्मीदवार उतारना, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश देना चाहती है।

क्यों खास है महेश केवट का चयन?

महेश केवट लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। वे बुंदेलखंड क्षेत्र के निवाड़ी जिले के ओरछा से आते हैं। भाजपा ने उन्हें ऐसे समय राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, जब पार्टी सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार नए प्रयोग कर रही है।

अति पिछड़ा वर्ग को क्या संदेश?

मध्यप्रदेश में केवट, निषाद, धीवर, मांझी और मछुआरा समाज की अच्छी उपस्थिति मानी जाती है। नर्मदा, बेतवा, तवा, चंबल और अन्य नदी क्षेत्रों से जुड़े जिलों में इन समुदायों का प्रभाव है। वरिष्ठ पत्रकार गणेश साकल्ले का कहना है कि भाजपा ने इस वर्ग को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन और सरकार में उन्हें भी सम्मानजनक भागीदारी दी जा रही है।

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अन्य पिछड़ा वर्ग पर फोकस?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं ओबीसी वर्ग से आते हैं। भाजपा पहले से ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। अब महेश केवट को राज्यसभा भेजने की पहल को अति पिछड़ा वर्ग (EBC) तक राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है।

यूपी तक पहुंचता है राजनीतिक संदेश

गणेश साकल्ले का कहना है कि महेश केवट का गृह क्षेत्र निवाड़ी  बुंदेलखंड में है, जो उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। उत्तर प्रदेश में निषाद, केवट और मछुआरा समाज कई लोकसभा और विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखता है।भाजपा का यह फैसला केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पड़ोसी उत्तर प्रदेश के इन समुदायों को भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई है।

2028 की तैयारी का हिस्सा?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महेश केवट की उम्मीदवारी केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है। इसे 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले अति पिछड़ा वर्ग में भाजपा के आधार को मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

मछुआ वर्ग को साधने का प्रयास

वरिष्ठ पत्रकार धनंजय प्रताप सिंह का कहना है कि मछुआ समाज का प्रतिनिधि भाजपा में कोई नहीं था। पार्टी ने राज्यसभा की टिकट देकर मध्य प्रदेश में समाज को बढ़ा संदेश दिया ही है। साथ ही उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में निवारसत मछुआ वर्ग को साधने का प्रयास किया है।

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केवट को जिताने के लिए क्या है भाजपा की रणनीति?

भाजपा के तीसरे राज्यसभा प्रत्याशी महेश केवट की जीत का रास्ता क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त समर्थन से होकर गुजरता है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पार्टी का फोकस कांग्रेस के उन नेताओं और विधायकों पर है, जिनको मीनाक्षी नटराजन के चयन को लेकर असंतोष हैं या संगठन में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि भाजपा विशेष रूप से कुछ आदिवासी विधायकों और ऐसे विधायकों के संपर्क में है, जिन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव कम अंतर से जीता था। माना जा रहा है कि ऐसे जनप्रतिनिधि भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं। राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता और क्रॉस वोटिंग करने पर किसी विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। इसी कारण राजनीतिक दलों के लिए ऐसे चुनावों में व्यक्तिगत संपर्क और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं। सूत्रों का दावा है कि भाजपा संभावित समर्थन जुटाने के लिए विभिन्न स्तरों पर संवाद कर रही है। यह भी चर्चा है कि भविष्य में राजनीतिक अवसरों और चुनावी टिकट जैसे मुद्दों को लेकर कुछ विधायकों से बातचीत की जा रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करें कांग्रेस विधायक

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार जीत के लिए उतारा है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का कोई विधायक या नेता किसी के संपर्क में नहीं है। यदि कोई विधायक अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करता है तो भाजपा उसका स्वागत करेगी। कांग्रेस को भाजपा की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस विधायकों को कहीं रखे हमें आपत्ति नहीं

कांग्रेस की विधायकों की बाड़ेबंदी पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए कहा कि विधायकों को कहीं भी रखा जाए, इसमें कोई आपत्ति नहीं है, उन्हें तो शेर की तरह खुलकर घूमना चाहिए। उन्होंने कहा कि शायद कांग्रेस को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्हें एक साथ रखा जा रहा है। भाजपा को अपने सभी विधायकों पर पूरा विश्वास है और वे डंके की चोट पर पार्टी के प्रत्याशियों के साथ खड़े रहेंगे।

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हमारा कोई विधायक बिकने वाला नहीं

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है और पार्टी के सभी 62 विधायक एकजुट होकर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। भाजपा पर निशाना साधते हुए सिंघार ने कहा कि भाजपा इसलिए आत्मविश्वास दिखा रही है, क्योंकि उसके पास पैसा और संसाधन हैं, लेकिन कांग्रेस का कोई भी विधायक बिकने वाला नहीं है। विधायकों को दूसरे राज्य भेजे जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में पार्टी की बैठक में चर्चा होगी और सामूहिक निर्णय लिया जाएगा कि विधायकों को बाहर भेजना है या प्रदेश में ही रखना है।



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