मध्य प्रदेश कोटे की तीसरी राज्यसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है। बीजेपी की आपत्ति पर रिटर्निंग ऑफिसर ने ये फैसला लिया है। इस फैसले के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

क्या था मामला?

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था।


दरअसल, हैदराबाद की फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में कॉरपोरेटर ए. श्रीलता ने मीनाक्षी नटराजन सहित अन्य लोगों के खिलाफ एक परिवाद दायर किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिव कुमार रेड्डी नामक व्यक्ति ने उनके साथ छेड़छाड़ की और मीनाक्षी नटराजन ने उसे संरक्षण दिया। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

मामले की समयरेखा


  • 11 मई 2025: शिकायतकर्ता ए. श्रीलता के अनुसार कथित घटना हुई।

  • 20 अगस्त 2025: ए. श्रीलता ने हैदराबाद की फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में मीनाक्षी नटराजन (अभियुक्त क्रमांक-4) सहित अन्य लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया।

  • 17 सितंबर 2025: अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मीनाक्षी नटराजन को समन/नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए।

  • 24 अक्टूबर 2025: मीनाक्षी नटराजन की ओर से उनके अधिवक्ता ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया। इसमें शिकायत को राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित बताते हुए आरोपों का खंडन किया गया और परिवाद निरस्त करने की मांग की गई।

  • 17 नवंबर 2025: अदालत ने मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया। तब से यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।


     


क्या बोली भाजपा?


भाजपा की ओर से प्रस्तुत आपत्ति में कहा गया है कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और मीनाक्षी नटराजन इस प्रकरण में अपना जवाब भी दाखिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल शपथ पत्र में इस मामले का उल्लेख नहीं किया गया। भाजपा ने इसे तथ्यों को छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन पर कार्रवाई और उसे निरस्त करने की मांग की है।



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कांग्रेस का क्या तर्क?


दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी न्यायालय ने अभी तक आरोप तय नहीं किए हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। इसलिए भाजपा की आपत्ति का कोई कानूनी आधार नहीं है।



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