पुराने और दुलर्भ नोटों के फोटो वाट्सएप पर भेज जालसालों द्वारा धोखाधड़ी की जा रही है। जिसका शिकार खेतीबाड़ी करने वाला हो गया। जालसाजों ने 19 लाख का झांसा देकर खाते से 1.65 लाख उड़ा दिये गये। पुलिस ने ऑनलाइन हुई शिकायत पर प्रकरण दर्ज किया है।
इंगोरिया के दंगवाड़ा में रहने वाला भैरूलाल पिता रामलाल गवली 35 साल खेतीबाड़ी का काम करता है। कुछ दिन पहले उसके वाट्सएप नम्बर 9691675156 पर दो अलग-अलग मोबाइल नम्बर 7667061077 और 6378091683 से पांच के नोट का फोटो भेजा गया। नोट भेजने वालों ने बताया कि ऐसा नोट आपके पास हो तो हमें फोटो भेजें। हमारे नोट से मिलान हुआ तो 19 लाख मिलेंगे। भैरूलाल के पास उस तरह का मिलता-जुलता नोट था, उसने वाट्सएप पर फोटो भेज दिया। कुछ देर बाद कॉल आया और बताया कि आपका नोट सही है, हमारे नोट से मिलता है। आपको 19 लाख की राशि मिलेगी।
पहले आप हमारे नम्बर पर 8199 रुपये भेजों उसके बाद आपके खाते में 19 लाख ट्रांसफर किये जाएंगे। चार दिनों तक भैरूलाल और जालसाजों के बीच इनामी राशि की चर्चा चलती रही। लालच में भैरूलाल ने जालसलों द्वारा मांगी गई राशि भेज दी। उसके बाद खाते से 1.65 लाख का ट्रांजेक्शन हो गया। अपने खाते से ऑनलाइन राशि का ट्रांजेक्शन होने पर धोखाधड़ी का आभास होते ही भैरूलाल ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। वहां से वेब पोर्टल के माध्यम से पुलिस तक पहुंची। इंगोरिया पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4) का प्रकरण दर्ज किया है।
कई साइटों पर ट्रैक्टर वाले नोट का विज्ञापन
सोशल मीडिया की कई साइट फेसबुक, ओएलएक्स, वाट्सएप पर कई दिनों से पुराने और दुलर्भ पांच के ट्रैक्टर वाले नोट का विज्ञापन सामने आ रहा है। जिसके बदले में लाखों रुपये देने की बात कही जा रही है। पांच ही नहीं 2 रुपये के नोट, सौ रुपये के नोट की डिमांड भी की जाती है। जालसाजों द्वारा किसी के पास ऐसा नोट होने पर पहले उन्हे बदले में दी जाने वाली लाखों की राशि के एवज में रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग, जीएसटी और टैक्स फीस के रूप में शुल्क जमा करने को कहा जाता है। अगर कोई शुल्क जता करता है तो उसका खाता खाली कर दिया जाता है।
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लालच-डर में सब कुछ गवां रहे लोग
साइबर फ्रॉड करने वालों द्वारा दिया जाने वाला लालच और दिखाया जाने वाला डर लोगों को अपना सब कुछ गवां पर मजबूर कर रहा है। जालसालों से बचने के लिये लगातार पुलिस द्वारा पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि अपना ओटीपी किसी को शेयर न करें। किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक न करें। साइबर फ्रॉड से बचने के लिये जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। बावजूद लोग जालसाजों का शिकार हो रही है। फ्रॉड करने वाले फर्जी नम्बरों का उपयोग करते हैं। पुलिस को उन तक पहुंचने के लिये काफी मशक्कत करना पड़ती है।
