मध्य प्रदेश मंत्रालय में कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब मंत्रियों को फाइलों के लिए कागजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मंत्रालय में ई-फाइल प्रणाली के माध्यम से मंत्रियों का अधिकांश कामकाज ऑनलाइन किया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग जैन के निर्देश पर मंत्रालय में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्रि-गण के विशेष सहायकों, विशेष कर्त्तव्य अधिकारी और निज सचिवों को ई-केबीनेट एप्लीकेशन का शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया गया। शीघ्र ही केबिनेट बैठकें ई-केबिनेट एप्लीकेशन पर आयोजित होंगी।
ये भी पढ़ें- MP News: मोहन भागवत बोले-मत-पंथ,भाषा,जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हमें जोड़ती है
प्रशिक्षण में बताया गया कि कैसे कागज रहित, सुरक्षित और आसानी से उपयोग होने वाला आधुनिक, डिजीटल इंटरफेस पूर्णत: गोपनीयता रखता है। इससे कभी भी कहीं भी बैठक की कार्य सूची को अपनी सुविधा अनुसार देखा जा सकता है। इस दौरान प्रतिभागियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान भी किया गया। आगामी बैठक से पहले मंत्रियों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनमें एजेंडा और संबंधित दस्तावेज पहले से अपलोड रहेंगे।
ये भी पढ़ें- MP News: सरसंघचालक मोहन भागवत बोले- भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है
प्रशिक्षण में ई-केबीनेट के एजेंडा की जरूरत के बारे में जानकारी दी गई। केबीनेट से संबंधित सूचनाओं और दस्तावेजों के डिजीटल रूप में तत्काल, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रभावी प्रस्तुति और ई-केबीनेट में प्रयोग के साथ ही बैठक की तैयारी एवं समीक्षा में होने वाली आसानी को बताया गया। प्रशिक्षण में इस नवीन प्रणाली से समय के प्रबंधन और बचत के बारे में भी बताया गया। मंत्रियों को बैठक में कागजी फाइलें नहीं दी जाएंगी, बल्कि वे टैबलेट पर ही सभी प्रस्ताव देख सकेंगे और अपनी सहमति या सुझाव दर्ज कर सकेंगे। जानकारी के मुताबिक आगामी कैबिनेट बैठक में पहली बार इस नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री और सभी मंत्री टैबलेट के जरिए कैबिनेट एजेंडा देखेंगे।
ये भी पढ़ें- MP News: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में 72 लाख का घोटाला, EOW ने बैंक अफसरों सहित कई पर दर्ज किया केस
मंत्रालय के सभी विभाग शामिल
ई-फाइल सिस्टम लागू होने के बाद मंत्रालय में आने वाली फाइलें डिजिटल रूप में तैयार हो रही है और ऑनलाइन ही आगे बढ़ाई जा रही है। इससे फाइलों के अटकने की समस्या कम और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आ रही है। अब अधिकारियों के साथ-साथ मंत्रियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करना होगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी। ई-फाइल के जरिए फाइल की पूरी मूवमेंट ट्रैक की जा सकती है, जिससे जवाबदेही तय करना आसान होगा। इसके साथ ही फाइल गुम होने या अनावश्यक देरी की समस्या भी कम होगी।
