प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी अब आर-पार की तैयारी में हैं। वर्षों से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन के तीसरे चरण का ऐलान किया है। 16 और 17 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह कौरव ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित, एनएचएम संविदा, एड्स नियंत्रण समिति, आउटसोर्स, रोगी कल्याण समिति, गैस राहत और आयुष विभाग से जुड़े कर्मचारियों की 14 सूत्रीय तथा आयुष की 9 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई मांगें गैर-आर्थिक और सैद्धांतिक हैं, जिन पर सहमति बनने के बावजूद आदेश जारी नहीं हुए। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है।
24 फरवरी को राजधानी में शक्ति प्रदर्शन
महासंघ ने चेताया है कि 24 फरवरी को हजारों कर्मचारी भोपाल में एकत्र होकर ‘न्याय यात्रा’ निकालेंगे और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया जाएगा। संगठन ने साफ किया कि ऐसी स्थिति की जिम्मेदारी विभाग की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे मानव सेवा से जुड़े महत्त्वपूर्ण विभाग में काम करते हैं, लेकिन मांगों की अनदेखी से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। अब सबकी निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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प्रमुख मांगें क्या हैं?
चिकित्सकों की तरह रात्रिकालीन आकस्मिक चिकित्सा भत्ता।
रेडियोग्राफर व संबंधित कर्मचारियों को रेडिएशन जोखिम भत्ता।
सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर्स को समान वेतन वृद्धि।
विभिन्न कैडरों के पदनाम परिवर्तन व ग्रेड पे संशोधन।
एनएचएम व एड्स नियंत्रण समिति के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण/नीति लागू करने की मांग।
आउटसोर्स व रोगी कल्याण समिति कर्मचारियों के लिए ठोस सेवा सुरक्षा नीति।
सातवें वेतनमान का लाभ 2016 से लागू करने सहित विभागीय विसंगतियों का समाधान।
