हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने सुशासन, न्याय और जनकल्याण के ऐसे आदर्श स्थापित किए, जो दो हजार साल बाद भी आज के समय में प्रासंगिक हैं। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं देते हुए इसे सृष्टि के आरंभ की पवित्र बेला बताया। मुख्यमंत्री भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के तहत “कोटि सूर्य उपासना” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और ब्रह्म ध्वज की स्थापना कर प्रदेश और देश की सेवा के लिए एकजुट रहने का संदेश दिया।

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नववर्ष प्रकृति, सृष्टि के संतुलन का प्रतीक 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय नववर्ष प्रकृति, सृष्टि और समाज के संतुलन का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने शासनकाल में अराजक तत्वों का दमन किया और समाज में शांति, न्याय और सद्भाव स्थापित किया। उन्होंने प्रजा को कर्जमुक्त कर सामाजिक समरसता को मजबूत किया। यही कारण है कि उनके नाम पर शुरू हुआ विक्रम संवत आज 2083वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार भी सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों पर चलते हुए सुशासन और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। इसी दिशा में वीर विक्रमादित्य शोधपीठ और वैदिक घड़ी जैसे प्रयास किए गए हैं।

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विक्रमादित्य पर आधारित नाटक का मंचन 

उन्होंने प्रदेश और देशवासियों को गुड़ी पड़वा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवरात्रि, चेटी चंड और अन्य पर्वों की शुभकामनाएं भी दीं। कार्यक्रम के दौरान सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित नाटक का मंचन किया गया, जिसकी मुख्यमंत्री ने सराहना करते हुए कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में नागरिकों और विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रमोत्सव जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।

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