डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम के जल क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के पांच गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और सहयोगी पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी है और यहां प्रवासी गिद्धों सहित विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।

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इन गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में अनुकूलन और निगरानी की अवधि पूरी करने के बाद छोड़ा गया। सभी पक्षियों को उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटर से लैस किया गया है, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। टैगिंग प्रक्रिया वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सकों की देखरेख में संपन्न हुई। यह पहल मध्य भारत के विकसित हो रहे ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम भी शुरू किया है। इससे गिद्धों के आवागमन, भोजन क्षेत्रों, पड़ाव स्थलों और मानव-जनित खतरों की पहचान में मदद मिलेगी। बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर प्रभावी संरक्षण रणनीति तैयार की जा सकेगी।

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गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में प्रकृति के सफाईकर्मी की भूमिका निभाते हैं और बीमारियों के प्रसार को रोकने में मददगार होते हैं। हाल ही में वल्चर  एस्टिमेशन-2026 के दौरान दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो प्रदेश में उनकी बढ़ती संख्या का संकेत है। कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।



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