मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और चयन परीक्षाओं में सीमित पद घोषित किए जाने को लेकर युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर नजर आने लगा है। मंगलवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे करीब दो हजार से अधिक शिक्षक अभ्यर्थियों ने राजधानी भोपाल में रैली निकालकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश के स्कूलों में हजारों शिक्षक पद वर्षों से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में जरूरत के मुकाबले बेहद कम पद निकाले जा रहे हैं। अभ्यर्थियों के मुताबिक यह स्थिति “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी है, जिससे बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर हो रहे हैं और स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।

चिनार पार्क से DPI तक रैली

आंदोलन में शामिल अभ्यर्थी दोपहर में चिनार पार्क पर एकत्र हुए और रैली के रूप में DPI कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शिक्षा आयुक्त को ज्ञापन सौंपने और शिक्षा मंत्री से मुलाकात की मांग की। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल तक ले जाया जाएगा।

रिक्तियां हजारों में, भर्ती सीमित

अभ्यर्थियों ने शासन द्वारा दिसंबर 2024 में जारी राजपत्र का हवाला देते हुए बताया कि उस समय तक माध्यमिक शिक्षकों के करीब 99 हजार और प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 1.31 लाख पद रिक्त थे। इसके बावजूद वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10,800 और प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 13 हजार पद ही घोषित किए गए हैं। उनका आरोप है कि वास्तविक जरूरत और घोषित पदों के बीच बड़ा अंतर है।

आरक्षित वर्गों के लिए पद शून्य होने का आरोप

प्रदर्शन के दौरान जनजातीय कार्य विभाग पर भी सवाल उठाए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई विषयों में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए शून्य पद दिखाए गए हैं, जिससे इन वर्गों के युवाओं में निराशा और असंतोष है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और आरक्षण की मूल भावना के खिलाफ बताया।

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छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

शिक्षक अभ्यर्थियों और संगठनों का कहना है कि पदों की कमी का खामियाजा सीधे छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक शिक्षक को एक से अधिक विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारने की बात कही गई है, लेकिन पर्याप्त नियुक्तियों के बिना यह लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।

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क्या हैं अभ्यर्थियों की मांगें

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में माध्यमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-2) में सभी विषयों के पदों में व्यापक वृद्धि, प्राथमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-3) में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने, दूसरी काउंसिलिंग शीघ्र शुरू करने और पद वृद्धि के साथ भर्ती पूरी होने तक नई पात्रता परीक्षा नहीं कराने की मांग शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और योग्य युवाओं को न्याय दिलाने के लिए है।



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