महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव ने वडोदरा को सनातन संस्कृति और मानव कल्याण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुजरात की धरती ने हमेशा धर्म, सेवा और राष्ट्र निर्माण की चेतना को दिशा दी है। महात्मा गांधी, सरदार पटेल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक यह परंपरा आज भी जीवंत है।

गिर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया

इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कर उत्कृष्ट प्रबंधन, वन संरक्षण और सुव्यवस्थित पर्यटन व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी पर्यटन और वन संपदा की दृष्टि से अपार संभावनाएं हैं, और गुजरात के अनुभवों से सीखकर मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों को और भी समृद्ध बनाया जाएगा। डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, और टाइगर प्रबंधन के लिए वन विभाग के अमले में बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने गुजरात में वन विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुए विकास की भी सराहना की।

स्वामी नारायण परंपरा का विश्व भर में विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी नारायण परंपरा आज केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिका, अबूधाबी, सऊदी अरब समेत कई देशों में भव्य मंदिरों के माध्यम से सनातन मूल्यों का प्रसार कर रही है। दुनिया भर में 600 से अधिक मंदिर, सत्संग दीक्षा जैसे शास्त्रसम्मत ग्रंथ और हजारों सेवाभावी संत सनातन परंपरा की मजबूती का प्रमाण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें मध्यप्रदेश से जुड़ी होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

एक साथ श्लोक पाठ, बना नया इतिहास

जन्मोत्सव के दौरान 15 हजार 666 बच्चों ने एक साथ ‘सत्संग दीक्षा’ ग्रंथ के 315 संस्कृत श्लोकों का सामूहिक पाठ किया। इस अद्भुत आयोजन से नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महंत स्वामी महाराज से जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

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संस्कृति और सेवा का संगम

कार्यक्रम में गुणातितानंद स्वामी के जीवन और कृतित्व पर आधारित नाटक का मंचन हुआ, जिसमें सामाजिक और धार्मिक सेवा के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज नई पीढ़ी को संस्कार, सेवा और राष्ट्रप्रेम से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यह आयोजन न सिर्फ एक जन्मोत्सव रहा, बल्कि सनातन संस्कृति की वैश्विक शक्ति और भारत की आध्यात्मिक विरासत का सशक्त प्रदर्शन भी बना।

 



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