मध्यप्रदेश में सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग तथा मानसिक-आध्यात्मिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य आनंद संस्थान द्वारा 14 जनवरी से प्रदेशव्यापी आनंद उत्सव की शुरुआत की जा रही है। यह उत्सव गांव से लेकर शहर तक लगभग 10 हजार स्थानों पर आयोजित होगा, जिसमें समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के 55 जिलों के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में एक साथ आनंद उत्सव आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सहभागिता पर विशेष जोर रहेगा।

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आनंद उत्सव का उद्देश्य लोगों को दैनिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और एकाकी जीवन से बाहर निकालकर सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से आनंद, अपनत्व और सहयोग की भावना से जोड़ना है। उत्सव के दौरान खेलकूद, योग, ध्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोकनृत्य, संगीत, भजन-कीर्तन, रस्साकशी, दौड़ सहित अनेक मनोरंजक एवं स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों के लिए खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, वहीं जरूरतमंदों को उपयोगी वस्तुओं का वितरण भी किया जाएगा।

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इस अवसर पर प्रदेश में ‘आनंद ग्राम’ की अवधारणा को भी धरातल पर उतारने की पहल की जा रही है। प्रत्येक जिले में एक आनंद ग्राम का चयन किया गया है। इस प्रकार प्रदेश के 55 चयनित गांव, 10 हजार आयोजनों के माध्यम से आनंद ग्राम मॉडल से जुड़ेंगे। इन गांवों में युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे ग्राम विकास में नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। आनंद ग्राम का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भावनात्मक, नैतिक, आत्मिक और आध्यात्मिक विकास को प्राथमिकता देना है। गांवों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना, छोटे-मोटे विवादों का समाधान स्थानीय स्तर पर करना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय उत्पादों और हुनर को पहचान दिलाकर स्वराज और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना इस मॉडल के प्रमुख लक्ष्य हैं।

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राज्य आनंद संस्थान के निदेशक सत्य प्रकाश आर्य ने बताया कि यह पहल महाराष्ट्र के हिवड़े बाजार जैसे सफल ग्राम मॉडल से प्रेरित है, जहां पंचायत राज और ग्राम सभा की सहभागिता से गांव ने समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के आनंद ग्राम भी सहभागिता आधारित विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर और स्वावलंबी गांवों के रूप में विकसित किए जाएंगे। आनंद उत्सव और आनंद ग्राम की यह संयुक्त पहल समाज को खुशियों से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और आत्मिक संतुलन को भी सशक्त करेगी।



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