मध्यप्रदेश सरकार ने व्यवसाय और उद्योग से जुड़े नियम-कानूनों को सरल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मंत्रालय में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस टास्क फोर्स की बैठक में संबंधित विभागों को 31 मई तक 28 प्राथमिक क्षेत्रों के नियम-कायदों को सरलीकरण करने की दिशा में प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और अन्य सुधारों में देश में अग्रणी है। इस क्रम में प्रदेश ने 2024 और 2025 में म.प्र. जन विश्वास संशोधन और प्रावधान एक्ट के तहत 26 कानूनों में 108 प्रावधान किए हैं, जिससे उद्योग लगाना और संचालन करना आसान हुआ है। उन्होंने सभी विभागों से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नियमों में सुधार करने और भारत सरकार के संबंधित विभागों व उच्च अधिकार समिति से मार्गदर्शन लेने का सुझाव दिया।
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बैठक में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की सचिव एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस टास्क फोर्स की अध्यक्ष नीलम शमी राव ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रथम चरण में मध्यप्रदेश ने 23 प्राथमिक क्षेत्रों में देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। दूसरे चरण में 5 और क्षेत्र—ऊर्जा, पर्यटन, पर्यावरण शिक्षा, हेल्थ केयर और अन्य शामिल किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अपने राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि सभी राज्यों के सुधारों और सरल नियमों की जानकारी साझा हो सके।
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इस अवसर पर वन, उच्च शिक्षा, नगरीय प्रशासन एवं विकास, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और पर्यटन जैसे विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों ने आगामी नियम-सुधारों और सरलीकरण की जानकारी दी। प्रमुख सचिव उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि जन विश्वास अधिनियम और नियम-कानूनों के सरलीकरण से उद्योग और व्यवसाय लगाने में काफी आसानी हुई है। मुख्य सचिव ने टास्क फोर्स को यह भी सुझाव दिया कि पीएम-प्रगति पोर्टल और परिवेश पोर्टल को जोड़कर देश के अन्य राज्यों में अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिस की जानकारी सभी को उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमों में समानता लाने की सलाह दी गई। सरल नियम और रिफॉर्म के जरिए मध्यप्रदेश ने व्यवसायिक माहौल को आसान बनाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। टास्क फोर्स ने सभी राज्यों के नियमों के सरलीकरण और सुधार के लिए अंतिम समय सीमा 30 जून 2026 तय की है।
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