भोपाल में यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसको लेकर अयोध्या बायपास पर पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। इसके सथ ही इसको विरोध भी शुरू हो गया हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने 25 दिसंबर को लोगों को पेड़ों को बचाने एकजुट होने की अपील की हैं। वहीं, कांग्रेस ने इसे आने वाली पीढ़ी की सांसों पर आरी चलाने वाला निर्णय बताया है। 

बता दें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इस परियोजना के तहत बायपास को छह लेन का बनाया जाएगा, साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड भी विकसित की जाएगी। एनएचएआई का दावा है कि  इससे भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को संभालने में मदद मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत अयोध्या बायपास पर चिन्हित तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स का सुधार किया जाएगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। सर्विस रोड बनने से आसपास की कॉलोनियों से आने-जाने वाले स्थानीय वाहनों को अलग मार्ग मिलेगा और मुख्य सड़क पर यातायात का दबाव कम होगा। NHAI अधिकारियों के अनुसार, पूरे बायपास का डिज़ाइन इस तरह तैयार किया गया है कि यह साल 2050 तक के अनुमानित ट्रैफिक को सुचारु रूप से संभाल सके। इस संबंध में NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नुवल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाना प्राधिकरण की प्राथमिकता है।

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7,871 पेड़ों की कटाई को सशर्त अनुमति

परियोजना के लिए पहले करीब 10 हजार पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव रखा गया था। इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश पर एक समिति का गठन किया गया। समिति ने जांच के बाद 7,871 पेड़ों की कटाई को सशर्त अनुमति दी है। शर्तों के तहत कटे प्रत्येक पेड़ के बदले 10 गुना पौधरोपण करना अनिवार्य होगा।

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हरित क्षेत्र विकसित करने 20 करोड़ खर्च करेंगे 

NHAI ने बताया कि अयोध्या बायपास परियोजना के तहत 10 हजार नए पौधे लगाए जाएंगे। इनमें एवेन्यू प्लांटेशन के तहत छायादार और फलदार वृक्ष शामिल होंगे। इस हरित विकास पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इसके अलावा, ये पौधे भोपाल के विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। साथ ही झिरनिया और जागरियापुर क्षेत्र में उपलब्ध राजस्व वन भूमि पर 61 हजार से अधिक पौधों का रोपण कर उसे विकसित वन क्षेत्र के रूप में तैयार किया जाएगा। NHAI ने यह भी बताया कि पिछले मानसून में झिरनिया गांव के पास सोनकच्छ टोल प्लाजा क्षेत्र में करीब 50 हजार पौधे मियावाकी तकनीक से लगाए गए थे।

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पेड़ों की कटाई आने वाली पीढ़ियों की सांस को खतरे में डाल रही

कांग्रेस पार्टी के मीडिया समन्वयक अनुभव बरोलिया ने कहा कि पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरण को नहीं, हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांस को भी खतरे में डाल रही है। सवाल यही है कि सरकार इतनी गंभीर चेतावनी के बावजूद हरित संरक्षण को प्राथमिकता क्यों नहीं दे रही? हर कटे पेड़ के लिए नए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों में रह गई है? आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य बनाना अब सिर्फ बातों में ही रह जाएगा। 

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पर्यावरण प्रेमियों का पेड़ों को काटने का विरोध 

वहीं दूसरी ओर, पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नागरिकों से 25 दिसंबर को दोपहर 2 बजे अयोध्या बायपास स्थित काकड़ा फार्म हाउस के सामने पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि वे पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकने की गुहार लगाएंगे। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का संदेश है कि सड़क से नहीं, पेड़ों से ऑक्सीजन मिलती है और पेड़ों की रक्षा सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।   



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