मध्यप्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां करीब 4 साल की एक बाघिन को यूरिया खिला कर मारा डाला और उसके शव को दफना दिया। जानकारी के अनुसार, बाघिन के गले में लगा रेडियो कॉलर दो दिन पहले से सिग्नल नहीं दे रहा था। इसके बाद वन विभाग की टीम आखिरी लोकेशन के आधार पर तलाश करते हुए देलाखेड़ी क्षेत्र के सांगा खेड़ा गांव (छिंदवाड़ा दक्षिण वन मंडल) पहुंची, जहां गड्ढे में हुआ शव बरामद किया गया।
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वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघिन ने दो दिन पहले इस क्षेत्र में एक बैल का शिकार किया था। इसके बाद ही उसका रेडियो कॉलर अचानक बंद हो गया। उसकी लोकेशन कॉलर आईडी के आधार पर वन विभाग ने ट्रेस की। जांच में सामने आया कि बाघिन ने एक बैल का शिकार किया था और लगातार खेत में लौट रहा था, जिससे नाराज किसान ने बैल के बचे अंगों पर यूरिया डाल दिया। बाघिन ने वहीं मांस खां लिया और दम तोड़ दिया। छिंदवाड़ा वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार खेत में बैल मृत मिला था और थोड़ी दूर गड्ढे में बाघिन मृत मिली। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें जहर की पुष्टि हुई। वहीं, मामले में किसान समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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शिकार की आशंका, मॉनीटरिंग पर सवाल
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि यह मामला शिकार से जुड़ा प्रतीत होता है। साथ ही रेडियो कॉलर की नियमित निगरानी में कमी भी उजागर हुई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। प्रदेश सरकार की नीति है कि किसी का गाय या बैल का शिकार होता है तो उसको क्षतिपूर्ति तत्काल मिलेगा। इसको लेकर जागरूक क्यों नहीं किया गया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शिकार और लकड़ी की तस्करी अनियंत्रित हो चुकी है। यहां के फील्ड डायरेक्टर को हटाया जाना चाहिए।