प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विधानसभा में विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद कहा कि सीएम केयर योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में उच्च स्तरीय तृतीयक सेवाओं हार्ट, किडनी, लिवर सहित प्रमुख अंग प्रत्यारोपण और ट्रॉमा सेंटर सशक्तीकरण के प्रावधान किए जा रहे हैं। इससे पहले चर्चा में विपक्ष ने प्रदेश में डॉक्टरों की कमी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को आदर्श स्वास्थ्य मानकों तक पहुंचाना है। इसके लिए प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक तीनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की 22 हजार 362 करोड़ 57 लाख रुपये की अनुदान मांगों को पारित कर दिया।
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दो वर्षों में 4000 चिकित्सकों की भर्ती की
मंत्री शुक्ल ने बताया कि चिकित्सकों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में लगभग 1000 एमबीबीएस और 1000 पीजी सीटों की वृद्धि हुई है। धार, कटनी, बैतूल और पन्ना सहित 13 जिलों में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज स्थापना की प्रक्रिया जारी है। लक्ष्य है कि प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज संचालित हों, ताकि भविष्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी न रहे। बीते दो वर्षों में 4 हजार से अधिक चिकित्सक और विशेषज्ञों की भर्ती भी की गई है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अंगदान और देहदान को प्रोत्साहन देने से जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब तक 1700 नागरिक अंगदान की सहमति दे चुके हैं।
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चूहों की रोकथाम के लिए करोड़ों खर्च : सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की इमारतें तो बन रही हैं, लेकिन पद स्वीकृत होने के बावजूद डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं और जहां पदस्थ हैं, वहां नियमित उपस्थिति नहीं रहती। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए चूहों की रोकथाम के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया।
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हवाई एंबुलेंस का प्रचार ज्यादा
सिंघार ने कहा कि सरकार हवाई एंबुलेंस सेवा का प्रचार करती है, जबकि कई स्थानों पर 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पा रही। टेलीमेडिसिन को उन्होंने ‘सिर्फ परिकल्पना’ बताते हुए पूछा कि जब प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं हैं तो ऑनलाइन उपचार कैसे संभव है। उन्होंने ड्रग सेफ्टी बजट में कमी, मात्र 79 ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती और अवैध दवाओं के कारोबार पर चिंता जताई। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और आत्महत्या के बढ़ते मामलों का उल्लेख किया। अनाधिकृत ब्लड बैंक संचालन और हालिया घटनाओं पर भी उन्होंने जवाबदेही तय करने की मांग की।
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उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर ही नहीं : डोडियार
सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सदन में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सैलाना के उप स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पूरे सैलाना क्षेत्र में एक भी महिला चिकित्सक पदस्थ नहीं है, जिसके कारण महिलाओं को उपचार के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि सैलाना के प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्र पर कम से कम एक-एक महिला चिकित्सक की शीघ्र नियुक्ति की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हो सकें।
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मेडिकल पढ़ाई की गुणवत्ता पर सवाल
मनावर से कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सरकार को आगाह किया। उन्होंने कहा कि यदि मेडिकल कॉलेजों में उच्च स्तर की पढ़ाई और प्रशिक्षण सुनिश्चित नहीं किया गया तो भविष्य में अयोग्य डॉक्टर तैयार होंगे, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि लापरवाही और कमजोर प्रशिक्षण का परिणाम यह हो सकता है कि ऑपरेशन जैसी गंभीर प्रक्रियाओं में भी भारी चूक हो जाए।
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नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा के लिए निजी विधेयक
अमरपाटन से कांग्रेस विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सार्वभौमिक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा की वकालत की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनका निजी विधेयक प्रक्रिया पूर्ण कर सरकार के विचारार्थ भेजा जा चुका है। उनका प्रस्ताव है कि सभी नागरिकों को 15 लाख रुपये तक और गंभीर बीमारियों में 25 लाख रुपये तक का कवरेज मिले। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में यह व्यवस्था है। आयुष्मान योजना की सीमा कई मामलों में कम पड़ती है, इसलिए व्यापक और समान स्वास्थ्य सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ बीमा कवरेज वालों को छोड़कर सभी को शामिल किया जा सकता है।
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आयुष्मान अनियमितता का मुद्दा उठाया
आयुष्मान योजना में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान प्रधानमंत्री की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन कुछ अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद जांच पूरी होने से पहले ही उनका आयुष्मान से निरस्त किया गया लिंक दोबारा बहाल कर दिया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि योजना का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था बनाई जाए और दोषी संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
