प्रदेश में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश सरकार नया और सख्त अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम लागू करने की तैयारी में है। विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि कानून का ड्रॉफ्ट तैयार हो चुका है और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन महीनों में नया फायर सेफ्टी एक्ट लागू कर दिया जाए।

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विधानसभा में उठा मुद्दा, अनिवार्य फायर ऑडिट की मांग

जबलपुर उत्तर-मध्य क्षेत्र से विधायक डॉ. अभिलाष पांडेय ने सदन में प्रभावी फायर सेफ्टी कानून और अनिवार्य फायर ऑडिट लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगजनी की घटनाएं केवल भवनों और दुकानों को ही नहीं, बल्कि लोगों की वर्षों की मेहनत और सपनों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। डॉ. पांडेय ने फायर रिटार्डेंट सामग्री, पैसिव फायर प्रोटेक्शन और स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को अनिवार्य करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने आग से होने वाले बड़े नुकसान के मुकाबले कम मुआवजे को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

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केंद्र के मॉडल एक्ट के आधार पर बनेगा कानून

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार के मॉडल फायर एक्ट के आधार पर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि 74वें संविधान संशोधन के तहत फायर सेवाओं की जिम्मेदारी नगर निकायों को दी गई है, लेकिन तकनीकी और संसाधन संबंधी सीमाओं के कारण वे पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसी वजह से राज्य स्तर पर सशक्त और एकरूप कानून लाने की जरूरत महसूस की गई है। मंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों के कानूनों का भी अध्ययन किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश में व्यावहारिक और प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके।

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5-10 मिनट में पहुंचेगी फायर ब्रिगेड

मंत्री ने कहा कि सरकार की योजना है कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद अधिकतम 5 से 10 मिनट के भीतर फायर ब्रिगेड घटना स्थल पर पहुंच जाए। इसके लिए शहरों में आवश्यकता अनुसार दो, तीन या पांच नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून तो तीन महीने में लागू हो जाएगा, लेकिन जमीन चिन्हांकन और बुनियादी ढांचा तैयार करने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। नगर निगमों और नगर पालिकाओं से प्रस्ताव लेकर विस्तृत योजना बनाई जा रही है।



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