प्रदेश में बस ऑपरेटरों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर मंत्री राव उदय प्रताप ने कहा कि ऑपरेटरों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 14 हजार बसें संचालित हो रही हैं, जबकि आवश्यकता करीब 16 हजार बसों की है। मंत्री ने कहा कि जिन रूटों पर पहले से प्राइवेट ऑपरेटर बसें चला रहे हैं, उन्हीं को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में बेहतर और व्यवस्थित परिवहन तंत्र स्थापित करना है, जो सरकारी निगरानी में संचालित हो और आम जनता को सुविधाजनक सेवा प्रदान करे।

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बता दें, प्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोला है। बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह हड़ताल होली के त्योहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। बस एसोसिएशन का मुख्य विरोध सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। उन्होंने परमिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। उनका कहना है कि रूट आवंटन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाया गया है।  डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में संशोधन का कोई लचीला प्रावधान नहीं है। परमिट नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड और परमिट निरस्त करने के सख्त नियम बनाए गए है। ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी और नगर परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी बसों के रूट सीमित किए जा रहे हैं।

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