मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत सचिवों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि पंचायत सचिवों की सेवा आयु सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाएगा और विशेष भत्ता भी मिलेगा। सेवाकाल के दौरान पंचायत सचिव की मृत्यु होने पर परिवार को दी जाने वाली 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि अनुकंपा नियुक्ति के बाद वापस नहीं ली जाएगी। साथ ही वेतनमान और अन्य सेवा शर्तों पर विचार के लिए समिति गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदेश स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सच्चे अर्थों में भारत की आत्मा गांवों में बसती है और देश का विकास तभी संभव है, जब गांव मजबूत और समृद्ध होंगे। इसी सोच के साथ राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी उद्योग और विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

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पंचायत सचिव योजना को कागज से जमीन पर पहुंचाते है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत सचिव जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की धुरी हैं। वे सरकारी योजनाओं को कागज से जमीन तक पहुंचाते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना हो या सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, पंचायत सचिव ग्रामीण परिवारों के लिए एक जिम्मेदार सदस्य की तरह कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवों की चिंता करना सरकार का कर्तव्य है।

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पंचायत सचिवों के लिए जिला स्तर पर कैडर का गठन 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत सचिवों के लिए जिला स्तर पर कैडर का गठन किया जा रहा है और उन्हें डिजिटल भारत के अनुरूप सभी आधुनिक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंचायतों को सम्मान, संसाधन और आधुनिक सुविधाएं देने के लिए अटल भवन और सामुदायिक भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण से प्रशासनिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाया गया है।

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सचिवों को दायित्व केवल नौकरी नहीं, जनसेवा का अवसर है

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि पंचायत सचिवों का दायित्व केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा का पवित्र अवसर है। वहीं पंचायत सचिव संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजेश पटेल ने मुख्यमंत्री के निर्णयों को पंचायत सचिवों के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।



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