मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी (नौरादेही) में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रही है। इससे प्रदेश में चीतों के तीन सुरक्षित आवास तैयार हो जाएंगे। हाल ही में चीतों के पांच नए शावकों के जन्म से इनकी संख्या में और वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पचमढ़ी को देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यावरणीय मॉडल बनाने की दिशा में कार्य करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब दो महीने बाद नौरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जलाशयों और नदियों में मगर, घड़ियाल और कछुओं को भी छोड़ा जाएगा, जिससे राज्य की जैव विविधता को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 में नामीबिया से 8 और वर्ष 2023 में साउथ अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। वर्तमान में प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़कर 53 तक पहुंच गई है, जिसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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पचमढ़ी को बनाएंगे सर्वश्रेष्ठ पर्यावरणीय मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह देश का पहला पर्यटन स्थल है जिसे इस प्रकार का प्रमाणन मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पचमढ़ी को देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यावरणीय मॉडल बनाने की दिशा में कार्य करेगी।
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19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश के सामने एक अच्छा उदाहरण बन रहा है। प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं और बांधों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। अभियान के पहले चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं बनाई गईं, जबकि दूसरे चरण में 72 हजार से अधिक संरचनाएं तैयार हो चुकी हैं और हजारों कार्य प्रगति पर हैं। इस वर्ष अभियान का नया चरण 19 मार्च 2026 से शुरू किया जाएगा।