मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती वर्ग-2 के चयनित अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे रहा है। पात्रता और चयन परीक्षा पास कर चुके हजारों उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। गुरुवार को प्रदेशभर से आए चयनित अभ्यर्थियों ने भोपाल में रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया।अभ्यर्थी पहले रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर एकत्र हुए, वहां से नारेबाजी करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर जल्द ज्वाइनिंग डेट घोषित करने की मांग की। अधिकारियों ने मार्च में अपडेट देने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में भी अधिकारियों से मुलाकात की।
10 हजार चयनित, हुआ वेरिफिकेशन फिर भी इंतजार
अभ्यर्थियों का कहना है कि मेन्स परीक्षा में करीब 10 हजार उम्मीदवार चयनित हुए, जिनमें से 4200 का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी हो चुका है। इसके बावजूद ज्वाइनिंग की तारीख तय नहीं की गई। उनके मुताबिक भर्ती प्रक्रिया का नोटिफिकेशन 2022 में जारी हुआ, 2023 में पात्रता परीक्षा हुई, अप्रैल 2025 में चयन परीक्षा आयोजित हुई और सितंबर 2025 में परिणाम घोषित कर चयन सूची जारी कर दी गई। लेकिन फरवरी 2026 तक भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए।
तीन महीने में नियुक्ति के नियम का हवाला
चयनित अभ्यर्थियों ने परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका” का हवाला देते हुए कहा कि रिक्त पदों के आधार पर चयन सूची के विरुद्ध 3 माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य है। विलंब होने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। उनका आरोप है कि स्पष्ट प्रावधान के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा।
यह भी पढ़ें-सिंगरौली कोल ब्लॉक पर विधानसभा में बवाल, JPC जांच की मांग, कांग्रेस का सदन से वॉकआउट
विरोध नहीं, हक मांगने आए हैं
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि हमने दो-दो परीक्षाएं पास की हैं। शासन के खिलाफ नहीं, अपने हक की मांग के लिए आए हैं। बार-बार सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। उनका आरोप है कि जो प्रक्रिया दो साल में पूरी होनी चाहिए थी, वह पांच साल तक खिंच गई है।
यह भी पढ़ें-स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने सदन में चर्चा, प्रदेश में सभी के मुफ्त इलाज की उठी मांग
कैग रिपोर्ट का हवाला, स्कूलों में भारी कमी
अभ्यर्थियों ने विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश के 1895 स्कूल ऐसे हैं जहां छात्र तो हैं, लेकिन एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। 29,116 स्कूलों में करीब 99,682 शिक्षकों की कमी बताई गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 70% पद भरे गए हैं। ऐसे में नियुक्ति में देरी को वे छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बता रहे हैं।
