ग्वालियर के डबरा में मंगलवार को नवग्रह पीठ की कलश यात्रा के दौरान मची भगदड़ ने एक महिला की जान ले ली। हादसे में सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह कार्यक्रम पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा था, जिसमें भारी जनसैलाब उमड़ा था।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में मंगलवार को नवग्रह पीठ की कलश यात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई। सात लोग घायल हुए हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। सभी को डबरा अस्पताल में भर्ती कराया गया है और एक महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं, अस्पताल में महिला के मृत घोषित होने के बाद आक्रोशित परिजन अस्पताल से शव लेकर कलश यात्रा स्थल के बीच लेकर पहुंच गए और प्रशासन को भगदड़ का जिम्मेदार ठहराया है। मृतक महिला की पहचान रति साहू के रूप में हुई है, जो हनुमान कॉलोनी की रहने वाली थी। गंभीर रूप से घायल महिला का नाम विमला है।


जानकारी के अनुसार, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा नवग्रह मंदिर में आज प्राण प्रतिष्ठा करा रहे थे, जिसका कार्यक्रम 20 फरवरी तक चलना है। इस भगदड़ पर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है।


बता दें कि कलश यात्रा के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। यात्रा के दौरान ही हादसा हो गया, लेकिन भगदड़ की वजह क्या थी, इसका पता नहीं चल पाया है। सूचना मिलते ही मौके पर एंबुलेंस भी पहुंच गईं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। कलश यात्रा का कार्यक्रम 20 फरवरी तक चलने के कारण इस भगदड़ ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। श्रद्धालु और परिजन अब व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस घटना के बारे में ग्वालियर के डीआईजी अमित सांघी ने बताया कि कलश वितरण के समय ये हादसा हुआ। इसमें रति साहू नाम की महिला घायल हो गईं। उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पर डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित किया है। मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है।

मंदिर में नवग्रह के साथ उनकी पत्नियां भी विराजमान

 

नवग्रह मंदिर ग्वालियर के डबरा में बना है। इसे अद्भुत इसलिए कहा जा रहा है कि एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां नवग्रह के साथ उनकी पत्नियां भी विराजमान हैं।12 एकड़ जमीन पर सिर्फ मंदिर बना है। यह मंदिर सनातन धर्म परंपरा, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र आधार पर 108 खंभों पर स्थापित किया है।हिंदू धर्म में 108 अंक का विशेष महत्व है।27 तारामंडल, जिनको नक्षत्र भी कहा जाता है।हर नक्षत्र की चार-चार दिशाएं होती हैं, जिनका योग 108 होता है। हर मंदिर और ग्रह को ऐसे स्थान दिया है कि कभी वह एक-दूसरे के सामने न आ सके।सूर्य मंदिर की स्थापना के साथ उनके तेज को नियंत्रित करने पानी का तालाब, नालियां व झरोखे बनाए गए हैं। 

 



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