केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दिए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे महाकौशल अंचल सहित पूरे मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सशक्त होगी, व्यापार-व्यवसाय को गति मिलेगी और पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया।
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5236 करोड़ की स्वीकृति, पांच वर्ष में पूरा होगा कार्य
केंद्र सरकार ने करीब 231 किलोमीटर लंबी गोंदिया-जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण के लिए 5236 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना आगामी पांच वर्षों में पूर्ण की जाएगी। इस दोहरीकरण से महाराष्ट्र के गोंदिया के साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष रूप से बालाघाट जैसे सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र के विकास में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।
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रामायण सर्किट का अहम कॉरिडोर
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस रेलमार्ग को रामायण सर्किट से लेकर उत्तर से दक्षिण भारत तक के महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में बताया है। इससे देश के विभिन्न हिस्सों के बीच रेल संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा तथा यात्री और माल परिवहन दोनों को सुविधा मिलेगी।
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वन्यजीव सुरक्षा पर विशेष प्रावधान
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। रेललाइन के मार्ग में आने वाले वन क्षेत्रों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए लगभग 450 करोड़ रुपये अंडरपास और फेंसिंग कार्यों पर व्यय किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त नर्मदा नदी पर एक बड़े पुल सहित कई मेजर और माइनर ब्रिजों का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे संरचना मजबूत और दीर्घकालिक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस परियोजना से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बेहतर रेल संपर्क से औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि एवं वन उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा होगी।
