मध्यप्रदेश में कोल ब्लॉक आवंटन में कथित धोखाधड़ी के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड, उसके निदेशक दीपक गुप्ता और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। यह कोल ब्लॉक घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक का 20वां दोषसिद्धि का फैसला है।

स्पेशल कोर्ट ने अपने आदेश में गुप्ता को 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ तीन साल की जेल, और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता सत्य नारायण द्विवेदी को दो साल की जेल और 20 हजार रुपये का जुर्माना और अमृत सिंह को 10 हजार रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की जेल की सज़ा सुनाई है।

सीबीआई के अनुसार, इस मामले में 4 अगस्त 2014 को प्रकरण दर्ज किया गया था। आरोप था कि कंपनी के निदेशक और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं ने मध्यप्रदेश के रावनवारा नॉर्थ कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन करते समय वित्तीय हैसियत, उत्पादन क्षमता, कंपनी के पास उपलब्ध भूमि और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी जानकारी में गलत व भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए थे।

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CBI के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि जांच के बाद, CBI ने 31 अगस्त, 2016 को आरोपी SKS इस्पात लिमिटेड (अब M/s SKS इस्पात एंड पावर लिमिटेड) के डायरेक्टर दीपक गुप्ता, सत्य नारायण द्विवेदी और अमृत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद इन आरोपियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई।



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